रविवार, 24 दिसंबर 2017

न्यू ईयर गिफ्ट-1


24 दिसंबर
आईपीएस अफसरों का दिसंबर एंड तक प्रमोशन हो जाता था। लेकिन, पिछले साल से वे पिछड़ने लगे हैं। आईजी अरुणदेव गौतम दिसंबर 2016 की बजाए दो महीने बाद एडीजी बनें थे। कुछ वैसा ही इस बार डीआईजी के साथ हो रहा है। 11 आईपीएस को डीआईजी प्रमोशन ड्यू हो गया है। बेचारे अजय यादव, बद्री नारायण मीणा, नेहा चंपावत, आरएस नायक, अभिषेक पाठक, डीएल मनहर, आरपी साय, जेएस बट्टी, जीएस दर्रा, सुशील द्विवेदी, अकबर कोर्राम टकटकी लगाए हुए हैं। लेकिन, भारत सरकार से अभी तक प्रमोशन के लिए हरी झंडी नहीं मिली है। अगले दो दिन छुट्टी है। इसके बाद दो-तीन रोज में अगर अनुमति नहीं मिली तो आईपीएस को नए साल के लिए वेट करना पड़ेगा। हालांकि, 2008 में एक बार सरकार ने 31 दिसंबर की देर रात आईपीएस की लिस्ट जारी कर दी थी। तब न न्यूज वेबसाइट थे और ना ही व्हाट्सएप। सो, एक जनवरी को सुबह अखबारों से लोगों को ट्रांसफर का पता चला था। 11 आईपीएस उसे ही याद कर अपने को तसल्ली दे रहे हैं कि शायद 2009 की तरह सरकार कहीं न्यू ईयर गिफ्ट न दे दें।

न्यू ईयर गिफ्ट-2

अब न्यू ईयर है तो सरकार आईएएस को कैसे छोड़ सकती है। जनवरी में कलेक्टरों की पोस्टिंग होगी, उसमें उम्मीद की जा रही है कि 2010 बैच तो कंप्लीट होगा ही 2011 बैच के भी दो-एक आईएएस के नम्बर लग सकते हैं। 2010 बैच के चार अफसरों में अब सिर्फ रानू साहू बच गई हैं। रानू फिलहाल डायरेक्टर हेल्थ हैं। हालांकि, उनके हसबैंक जयप्रकाश मौर्य सुकमा कलेक्टर हैं, ऐसा कहकर रानू को कलेक्टर बनने की राह में रोड़े अटकाएं जाते रहे हैं। लेकिन, अब स्थितियां बदलने जा रही है। तो लगता है, उन्हें जिला मिल जाएगा। फिर, बिना 2010 बैच के कंप्लीट किए, 2011 बैच का नम्बर लगेगा नहीं। सो, न्यू ईयर गिफ्ट की प्रतीक्षा में 2011 बैच भी बेकरार है।

बैड ईयर?

आईएएस, आईपीएस के लिए 2017 बेहद खराब रहा। सीबीआई को रिश्वत देने के मामले में प्रिंसिपल सिकरेट्री बीएल अग्रवाल को जेल जाना पड़़ा। इसके बाद अग्रवाल और अजयपाल सिंह को राज्य सरकार की अनुशंसा पर भारत सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। यह साल आईपीएस के लिए भी बढ़ियां नहीं रहा। आईजी, डीआईजी लेवल के उसके तीन अफसर टर्मिनेट हो गए। जनवरी में आईजी राजकुमार देवांगन से शुरूआत हुई और डीआईजी एएम जुरी और केसी अग्रवाल पर जाकर एंड हुआ। आईपीएस के लिए तो साल का अंत भी अच्छा नहीं रहा। सरकार ने डीजी एमडब्लू अंसारी के रिटायरमेंट से 15 दिन पहिले ही उन्हें बिना विभाग का कर दिया। आईएफएस में किसी अफसर पर कार्रवाई तो नहीं हुई लेकिन, डायरेक्टर कल्चर आशुतोष मिश्रा का स्वाईन फ्लू से निधन लोगों को जरूर दुखी किया।

सौदान का डंडा

बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह का सत्ताधार पार्टी में क्या रुतबा है, 22 दिसंबर को विधानसभा में साफ दिखा। सौदान अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में पहुंचे थे। स्पीकर कक्ष में सबसे पहिले उन्होंने वोटिंग से गायब छह में से एक बाहुबलि विधायक की क्लास ली। विधायकजी हाथ जोड़े खड़े रहे और सौदान सिंह उन्हें सुनाते रहे। सौदान के निर्देश पर मंत्री महेश गागड़ा समेत सभी छह विधायकों को संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने फौरन नोटिस जारी कर दी। यही नहीं, सीट छोड़कर इधर-उधर घूम रहे मंत्री, विधायकों को जब पता चला कि सौदान भाई साब सदन की कार्रवाई देखने दर्शक दीर्घा में आने वाले हैं, स्कूल के अच्छे विद्यार्थी की तरह सभी अपनी सीटों पर जा बैठे। सौदान के सदन पहुंचने से आधा घंटे पहिले रायपुर के एक मंत्री इतने बेचैन थे कि चार बार स्पीकर कक्ष में आकर पूछे, भाई साब आए क्या…? आखिरी में उकता कर स्पीकर के पीए ने कहा, सर, आप अंदर बैठिए, वे आएंगे तो मैं आकर आपको बता दूंगा।

रेरा का पेड़ा

सूबे के सबसे मलाईदार पोस्ट रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी याने रेरा। रेरा में जो भी बैठेगा जाहिर है, पेड़ा खाएगा। पता चला है, सरकार ने पेड़ा खाने वाले का नाम तय कर दिया है। लिफाफा भी तैयार कर अलमारी में रखा गया है। बस, ऐलान होने का इंतजार किया जा रहा है। रेरा के पेड़ा के लिए एक दर्जन लोगों ने अप्लाई किया है।

आईजी की लिस्ट

बिलासपुर रेंज के आईजी पुरुषोतम गौतम 31 दिसंबर को रिटायर हो जाएंगे। हालांकि, सरकार ने उन्हें नाइट वाचमैन बनाकर बिलासपुर भेजा था कि अमित कुमार के सीबीआई डेपुटेशन से लौटने के बाद सब ठीक कर लिया जाएगा। लेकिन, अमित कुमार सीबीआई से रिलीव नहीं हो पाए। और, गौतम सात महीने पूरे कर लिए। हालांकि, सरकार के पास अभी भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है, आईजी किसे बनाएं। क्योंकि, अमित कुमार अभी तक लौटे नहीं। और, आईजी लेवल पर अफसर हैं नहीं। आईजी में दो ही अफसर बचे हैं। जीपी सिंह और एसआरपी कल्लूरी। जीपी बिलासपुर और रायपुर में आईजी रह चुके हैं। पिछले फेरबदल में उन्होनें दुर्ग के लिए मना कर दिया था। और, कल्लूरी को सरकार फिलहाल रेंज देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में, सरकार फिलहाल किसी को बिलासपुर रेंज का एडिशनल चार्ज देकर अमित कुमार के आने तक याने 15 जनवरी तक वेट कर सकती है। या फिर अमित के आने की प्रत्याशा में आईजी की लिस्ट निकाल सकती है। ताकि, अमित लौटकर ज्वाईन कर लेंगे। विधानसभा खतम हो जाने के बाद सरकार अब इसे मूर्त रुप देगी।

मजा किरकिरा

विधानसभा का सत्र और ट्रांसफर लिस्ट ने अबकी अफसरों को विंटर वैकेशन का मजा किरकिरा कर दिया। वरना, 15 दिसंबर के बाद अधिकांश अफसर सैर-सपाटे पर चले जाते थे। क्योंकि, 25 के बाद भीड़ बढ़ जाती है। लेकिन, इस बार सरकार ने साफ कर दिया था, सत्र के चलते किसी को छुट्टी नहीं मिलेगी। फिर, आईएएस, आईपीएस में बड़ी लिस्ट निकलने वाली है। उन्हें खतरा था….कहीं छुट्टी पर गए तो इधर गिल्ली न उखड़ जाए। दरअसल, आने वाले एक महीने में आईपीएस के साथ ही कलेक्टरों के ट्रांसफर होंगे। जाहिर है, जो क्रीज पर जमे हैं, उन्हें जमे रहने या और बढ़ियां विकेट पर खेलने की लालसा होगी। और, जो मैदान से बाहर हैं, वे इस जुगत में हैं कि उन्हें अबकी मौका मिल जाए। ऐसे में, छुट्टी…ना बाबा। घूमना-फिरना बाद में होता रहेगा।

पत्नियां पर पाबंदी?

विधानसभा में अक्सर ऐसा हो रहा है….कार्रवाई के दौरान दर्शक दीर्घा मेंं जब पत्नी आकर बैठ जाती है, तो नेताओं के बोलने का संतुलन गड़बड़ा जाता है। कई बार पत्नियों पर रौब झाड़ने के लिए विधायक कुछ ज्यादा ही बोल जाते हैं। शीत सत्र में सत्ता पक्ष के
एक विधायक की पत्नी जैसे ही सदन में पहुंची, विधायकजी कांग्रेस पर चढ़ बैठे। कांग्रेस नेताओं की रेस्ट हाउस में कारगुजारियां से लेकर और भी बहुत कुछ कह गए, जिसे स्पीकर को कार्रवाई से निकलवाना पड़ा। ऐसे में, विधानसभा में लोगों ने खूब चुटकी ली….अध्यक्षजी को भाषण के दौरान पत्नियों के दर्शक दीर्घा में आने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डिप्टी सिकरेट्री तारण सिनहा को चीफ सिकरेट्री सचिवालय से पंचायत विभाग में ट्रांसफर क्यों किया गया?
2. रायपुर एसपी संजीव शुक्ला का रायपुर से मन उचट क्यों गया है?

रेरा इज द बेस्ट?

17 दिसंबर

रेरा चेयरमैन का पद भले ही रसूख और मलाई वाला होगा, मगर मुख्य सूचना आयुक्त का ओहदा और वेतन देखकर उसके दिल में हमेशा दर्द उठता रहेगा। रेरा चेयरमैन की सेलरी चीफ सिकरेट्री याने 80 हजार का स्केल है। सब मिलाकर वेतन के रूप में रेरा चेयरमैन को सवा दो लाख रुपए मिलेंगे। वहीं, मुख्य सूचना आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की हैसियत होने के चलते ढाई लाख रुपए सेलरी….साल में दो बार एलटीसी की पात्रता हासिल है। जबकि, रेरा चेयरमैन के ग्रेड के अफसरों को दो साल में एक बार एलटीसी की सुविधा मिलती है। बता दें, प्रदेश में ढाई लाख वेतन वाला कोई दूसरा पोस्ट नहीं है। हालांकि, जीएडी ने रेरा चेयरमैन का वेतन बढ़ाने के लिए कम कोशिशें नहीं की। नोटशीट भी चल चुकी थी। बाद में पता चला कि रेरा के अपीलीय अधिकारी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या उनके समकक्ष होंगे। इनका वेतन ढाई लाख रुपए है। सो, अपीलीय अधिकारी के बराबर रेरा के चेयरमैन की सेलरी हो नहीं सकती। लिहाजा, मन मारकर उसे सवा दो लाख पर ही फायनल कर दिया गया। बावजूद इसके, रेरा का मुकाबला नहीं है।, रेरा इज द बेस्ट।

नेतागिरी में नुकसान

भानुप्रतापुर के आईएएस एसडीएम वेंकट को सरकार ने मंदिर तोड़ने की घटना में वहां से हटा दिया। लेकिन, इससे ज्यादा नुकसान उन्हें आईएएस एसोसियेशन की नेतागिरी में हो गया। वेंकट की पोस्टिंग को लिए अजय सिंह को साथ लेकर आईएएस एसोसियेशन चला गया चीफ सिकरेट्री के पास। इससे सरकार नाराज हो गई। जाहिर है, कई बार अपने लोग ही काम बिगाड़ देते हैं। भानुप्रतापपुर की घटना कैसे हुई, इसकी विस्तृत जानकारी रायपुर नहीं आई है, लेकिन वेंकट ठीक-ठाक एवं उत्साही अफसर माने जाते हैं। मगर आईएएस लॉबी के चलते वे विवादित हो गए।

जंगल और बिहार

सरकार ने जंगल विभाग को बिहार के दो अफसरों के हवाले कर दिया है। पहले सीके खेतान को एसीएस फॉरेस्ट बनाया फिर आरके सिंह को पीसीसीएफ। खेतान सासाराम से हैं तो सिंह आरा के। दोनों अपने-अपने फील्ड के मास्टर हैं। पीसीसीएफ तो वर्ल्ड बैंक से लेकर और कई बड़े प्रोजेक्टों में काम कर चुके हैं। सरकार ने उन्हें वाईल्डलाइफ का दोहरा चार्ज देकर और वजनदार बना दिया है। लेकिन, खेतान ने पहली गेंद पर चौका लगाकर पारी की शुरूआत की है, उससे वन विभाग भौंचक हैं। उन्होंने अचल संपत्ति का ब्यौरा जमा न करने वाले अफसरों की जानकारी मांग ली है। चलिये, उम्मीद कीजिए, खेतान और सिंह मिलकर वन विभाग की छबि दुरुस्त करें।

बाड़ ही खेत खा जाए तो….

बात कुछ साल पुरानी है….अमित कटारिया रायगढ़ के कलेक्टर थे। उनकी पत्नी जिंदल स्टील के प्लेन का पायलट बन गई थी। तब तत्कालीन चीफ सिकरेट्री सुनिल कुमार बेहद नाराज हुए थे। उनका कहना था कि इससे मैसेज अच्छा नहीं जाता। जाहिर है, अफसर अगर प्रायवेट लोगों से ओब्लाइज है, तो वह इसका फायदा उठाएगा या लेने की कोशिश करेगा। ताजा खबर है, एक आईएएस ने अपनी पत्नी को प्रायवेट यूनिवर्सिटी का डायरेक्टर बना दिया है। हालांकि, इस पर सरकार भी कुछ नहीं कर सकती। क्योंकि, बाड़ ही अगर खेत खाने लगे तो भी खेत की रक्षा कौन करेगा।

वक्त की बात!

आईएएस पी जॉय उम्मेन छत्तीसगढ़ में साढ़े तीन साल चीफ सिकरेट्री रहे। विवेक ढांड के बाद सर्वाधिक समय तक। नया रायपुर की बुनियाद उन्होंने ही रखी। मंत्रालय और डायरेक्ट्रेट भी उनके समय बना। लेकिन, वीआरएस लेने के बाद अब उनका वक्त कुछ ठीक नहीं चल रहा है। केरल में जिस परिवहन मंत्री थामस कूक का वे एडवाइजर बने थे, जमीन घोटाले में सीएम ने उनकी छुट्टी कर दी। उम्मेन चूकि, मंत्री के सलाहकार थे, इसलिए मंत्री के साथ उन्हें भी हटना पड़ गया।

वेटिंग सीएस और ब्लडप्रेशर

वेटिंग सीएस अजय सिंह की ताजपोशी में कोई अड़चन नहीं है। इसके बाद भी ऐसा कुछ हो रहा है या किया जा रहा है कि उनकी ब्लडप्रेशर बढ़ जा रहा होगा। असल में, बाजार में चर्चा है कि चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड को सरकार एक्सटेंशन दे सकती है। तो उधर, सीएम ने हैदराबाद में एनएमडीसी के डायमंड जुबली प्रोग्राम में एन बैजेंद्र कुमार की इतनी जोर से पीठ थपथपा आए कि पूछिए मत! सीएम बोले, बैजेंद्र मेरे परिवार के हिस्सा थे, और इन्हें एनएमडीसी के चहुमुखी विकास के लिए मैंने आपके पास भेजा है। बैजेंद्र की अब ऐसी तारीफ होगी तो वेटिंग सीएस की स्थिति समझी जा सकती है।

डीजी की नाराजगी

कोंडागांव एसपी को डीजी नक्सल डीएम अवस्थी की नाराजगी भारी पड़ गई। सरकार ने उनकी छुट्टी कर दी। दरअसल, नक्सल मूवमेंट में कोंडागांव पुलिस की ढिलाई से डीएम नाराज थे। उपर से नक्सलियों द्वारा बुधवार को गाड़ियों को जलाने की घटना हो गई। डीएम ने यह जानकारी सरकार को दी। और, सरकार ने एसपी को हटाने में देर नहीं लगाई।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चार में से फर्स्ट फेज में सरकार किन दो आईपीएस अफसरों को सीबीआई में जाने के लिए हरी झंडी देने जा रही है?
2. मुख्यमंत्री के तथास्तु कहने के बाद भी आरा मिल प्रकरण की फाइल क्यों लटकाई जा रही है?

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

सोच में जीएडी

रिटायर सिकरेट्री दिनेश श्रीवास्तव ने रिटायरमेंट के बाद प्रमोशन का डिमांड करके सामान्य प्रशासन विभाग को सोच में डाल दिया है। उन्होंने जीएडी को लिखा है कि जब 94 बैच के आईएएस को ड्यू डेट से 14 महीने पहिले प्रमुख सचिव बना दिया तो मेरा क्या कुसूर था। श्रीवास्तव 93 बैच के आईएएस थे। पिछले साल मार्च में वे सिकरेट्री से रिटायर हुए। श्रीवास्तव का कहना है, जीएडी चाहता तो उन्हें प्रमोशन देकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बना सकता था। बहरहाल, जीएडी के अफसर उधेड़बुन में हैं कि श्रीवास्तव को क्या जवाब दिया जाए।

झलियामाड़ी स्टाईल

शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को भी झलियामाड़ी कांड की तरह निबटाया गया। याद होगा, रमन सरकार की दूसरी पारी में कांकेर जिले के झलियामाड़ी ट्राईबल हॉस्टल में बच्चियों के साथ सेक्सुअल ह्रासमेंट की घटनाएं हुईं थीं। तब छत्तीसगढ़ हिल गया था। कांग्रेस ने इसे बड़ा इश्यू बनाते हुए पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने के साथ ही राज्य बंद का ऐलान किया था। लेकिन, सरकार के रणनीतिकारों ने ऐसा किया कि मामला ही फुस्स हो गया। आंदोलन शुरू होने की सुबह पीड़ित बच्चियों के परिजनों का लेकर बस सीधे सीएम हाउस के अंदर चली गई थी। मीडियाकर्मी जब हाउस पहुंचे, तब तक सीएम से परिजन मुलाकात कर कार्रवाइयों पर संतोष जता चुके थे। इसी तरह का कुछ ऑपरेशन शिक्षाकर्मी में हुआ। सरकार ने अपने दो प्यादों से वजीर मारने जैसा काम कर दिखाया। मंत्रियों, अफसरों के साथ ही कांग्रेस को सुबह मीडिया से पता चला कि स्ट्राईक कल रात में ही समाप्त हो गई है। वह भी बिना शर्त। कांग्रेस के पास अब कोसने के अलावा कोई चारा नहीं था।

विकास शील डेपुटेशन पर?

प्रिंसिपल सिकरेट्री विकास शील डेपुटेशन पर दिल्ली जा सकते हैं। बहुत पहिले उन्होंने सरकार से अनुमति मांगी थी। सरकार के पास उनका लेटर पेंडिंग है। विकास शील की वाइफ निधि छिब्बर इसी साल मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में दिल्ली गई हैं। अब चूकि, गौरव द्विवेदी दंपति प्रतिनियुक्ति से लौट कर छत्तीसगढ़ आ गए हैं। गौरव की पत्नी ज्वाईन करने के बाद चाईल्ड केयर लीव पर चली गई है। जाहिर है, वे भी कुछ दिन बाद लौट आएंगी। लिहाजा, विकास शील को डेपुटेशन के लिए एनओसी देने में अब कोई दिक्कत नहीं है। समझा जाता है, इसी दृष्टि से डॉ0 रोहित यादव को सामान्य प्रशासन विभाग का एडिशनल चार्ज दिया गया है। ताकि, विकास शील के जाने के बाद रोहित जीएडी संभाल लें।

ऑल रिजनल सर्विस

आईएएस अफिसर ऑल इंडिया सर्विस के होते हैं। इसलिए नाम भी है इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस। मगर छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्र विशेष के आईएएस जिस तरह क्षेत्रवाद चला रहे हैं, इससे लगता नहीं कि वे ऑल इंडिया सर्विस के अफसर हैं। आलम यह है कि उन अफसरों की एक्टिवीटी को देखकर अब ब्यूरोक्रेसी में लोग कहने लगे हैं, इन लोगों के लिए एक ऑल इंडिया सर्विस के भीतर एक ऑल रिजनल सर्विस बना देना चाहिए….ऑल रिजनल सर्विस का व्हाट्सएप बनाकर उसी में अपना गुटरगूं करते रहे।

विधानसभा के बाद

पुलिस महकमे की सर्जरी अब विधानसभा के बाद ही हो पाएगी। 22 दिसंबर को सत्र ओवर हो जाएगा। इसके बाद 25 को क्रिसमस है। इसी के आसपास डीपीसी होगी। आधा दर्जन आईपीएस इसमें प्रमोट होकर डीआईजी बनेंगे। तो कुछ को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। डीआईजी बनने वालों में चार एसपी भी हैं। जाहिर है, इनके अलावा कुछ और जिलों में चुनावी दृष्टि से सरकार एसपी बदलेगी। सब मिलारक लगभग आठ-से-नौ जिलों के कप्तान बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

मंत्री ने यूं बचाया

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मौजूद न रहने के चलते रायपुर के जिस असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी को सरकार ने सस्पेंड किया था, उसे आखिरकार मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने बहादुरी से बचा लिया। राजवाड़े ने सस्पेंशन की खबर मिलने पर उल्टे तत्कालीन प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल को नोटिस इश्यू कर दी थी। बाद में पता चला, मुख्यमंत्री के अनुमोदन से अफसर को निलंबित किया गया है तो मंत्री ने लिख दिया उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने शोयब को मंदिर हसौद भेजा था, इसलिए शोयब सीएम के कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह पाए। मंत्री के इस नोटिंग से लेबर विभाग सन्न है। ऐसा कि कोर्ट में वह विभाग का जवाब नहीं रख पाया। जवाब दे भी क्या….विभाग इसमें फंस जाएगा। क्योंकि, मंत्री बोल रहे हैं, मैंने अफसर को कहीं और भेजा था। तो फिर, सरकारी नाफारमानी कैसे हुई। इसी आधार पर कोर्ट ने स्टे दे दिया।

नया ट्रेंड

एंटी करप्शन ब्यूरो ने पिछले महीने एक एसडीएम को रिश्वत लेते हुए पक़ड़ा तो एसडीएम के समाज के लोग अगले दिन सरकार से मिलने पहुंच गए। अब, सीडी कांड में विनोद वर्मा को निर्दोष बताते हुए उनके समाज के लोग सड़क पर उतर गए। उधर, सिकरेट्री ईरीगेशन सोनमणि बोरा ने एक सब इंजीनियर को सस्पेंड क्या किया इंजीनियर उन्हें लाल सलाम बोल ललकारने लगे हैं। ऐसे में, राज्य में अराजकता फैल जाएगी….कोई अफसर काम ही नहीं कर पाएगा। हालांकि, अफसरों को भी कार्रवाइयों में भेदभाव नहीं बरतनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. मुख्यमंत्री द्वारा जोगी कांग्रेस को चुनौती के रूप में उभरना बताने के पीछे क्या राजनीतिक उद्देय हो सकते हैं?
2. देवेंद्र वर्मा ने प्रमुख सचिव संसदीय कार्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष का सलाहकार बनने से भी क्यों इंकार कर दिया?

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

वेटिंग सीएस और प्रोबेशन पीरियड

3 दिसंबर
वेटिंग सीएस और प्रोबेशन पीरियड
राज्य सरकार ने एसीएस अजय सिंह को वेटिंग सीएस के तौर पर प्रोबेशनर के रूप में काम लेना शुरू कर दिया है। मंत्रालय की कई अहम मीटिंगों में विवेक ढांड की जगह इन दिनों अजय सिंह नए जाकिट में दिख रहे हैं। 30 नवंबर को सीएम फेलोशिप के तहत सलेक्ट यंग प्रोफेशनल के साथ फोटो सेशन में भी सीएम की दाई ओर अमन सिंह औ बाएं अजय सिंह नजर आए। लेकिन, दिक्कत यह है कि सरकार ने उनका प्रोबेशन पीरियड तय नहीं किया है। हफ्ते, महीना या जनवरी….कुछ कहा नहीं जा सकता। रेड़ा का पेड़ा बंटने के बाद भी कोई भरोसा नहीं….आजकल करते-करते…..। जाहिर है, अजय सिंह को यह ब्लाइंड प्रोबेशन पीरियड परेशान कर रहा होगा।

राजनीति में अंसारी?

84 बैच के आईपीएस डब्लूएम अंसारी के लिए दिसंबर आखिरी महीना होगा। 31 को वे रिटायर हो जाएंगे। अंसारी तेज अफसर माने जाते हैं। लेकिन, उनकी किस्मत उतनी तेज नहीं निकली। राज्य बनते ही वे जोगी सरकार के निशाने पर आ गए थे। जशपुर के लीली कुजूर दुष्कर्म कांड में उन्होंने तत्कालीन सरकार के जशपुर के प्रिय कलेक्टर एमआर सारथी के खिलाफ दबाकर जांच कर दी थी। इस पर सरकार ने उन्हें उस दंतेवाड़ा का डीआईजी बनाकर भेज दिया था, जो ठीक से जिला का शेप नहीं ले सका था। कांग्रेस के निशाने पर रहने का स्वाभाविक लाभ उन्हें बीजेपी शासन में भी नहीं मिला। उल्टे, एडीजी जेल रहने के दौरान डेपुटेशन पर दिल्ली जाकर उनसे एक बड़ी भूल हो गई। अगर वे दिल्ली नहीं गए होते तो गिरधारी नायक और अंसारी याने दो-दो सीनियर अफसरों को सुपरशीट करके एएन उपध्याय को डीजी बनाने से पहिले सरकार को सोचना पड़ता और बनाती तो भी बैलेंस करने के लिए अंसारी का ठीक-ठाक विभाग मिल गया होता। अब खबर है, अंसारी रिटायर होने के बाद राजनीति में किस्मत आजमाने की सोच रहे हैं। यूपी में उनके परिवार से जुड़े लोग राजनीति में हैं भी। दुआ करें, राजनीति में उनकी किस्मत साथ दे दें।

सिर मुड़ाते ओले….

पंचायत विभाग संभालने वाले आरपी मंडल के लिए शिक्षाकर्मियों की हड़ताल सिर मुड़ाते ओले पड़ने जैसी हो गई है। शिक्षाकर्मियों की हड़ताल उन्हें गिफ्ट में मिला ही अलबत्ता, विभाग का चार्ज लेने से एक दिन पहिले ही सरकार ने हड़ताली शिक्षकों से बात करने का शेड्यूल तय कर दिया। हालांकि, वार्त्ता विफल हो गई। मगर मंडल सिर पर हाथ फेरते हुए खुद ही चुटकी ले रहे हैं….मेरा क्या होगा…..। दरअसल, वे सचमुच सिर मुड़ाएं हुए हैं। हाल ही में उनकी मदर इन लॉ की डेथ हुई है।

दो बैचलर, एक विभाग

सरकार ने नगरीय प्रशासन सिकरेट्री रोहित यादव को जीएडी सिकरेट्री का एडिशनल चार्ज दिया है। विकास शील इस विभाग के प्रिंसिपल सिकरेट्री हैं। इसमें खबर ये नहीं है कि जीएडी में दो सिकरेट्री क्यों….पहले भी ऐसा रहा है। एक आईएएस देखता है, दूसरा राज्य प्रशासनिक सेवा। खास यह है कि दोनों बिना पत्नी वाले हैं। बिना पत्नी का आशय आप दूसरा ना निकालें। दोनों की आईएएस पत्नी डेपुटेशन पर दिल्ली चली गई हैं। पहले विकास शील की पत्नी निधि छिब्बर डिफेंस में गईं और इसी अक्टूबर में रोहित की पत्नी रितू सेन दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में। लिहाजा, दोनों बैचलर हैं। ऐसे में, सरकार ने सोचा….दोनों सिंगल को एक विभाग में कर दो, पत्नियों के जाने का गम हो या खुशी, बेचारे एक-दूसरे से शेयर करते रहेंगे।

सब पर भारी

ठाकुर राम सिंह भले ही सरकार के सबसे नजदीक और पसंदीदा आईएएस रहे हों मगर ठसके के साथ पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग में अशोक अग्रवाल ने सबको पीछे छोड़ दिया। राम सिंह को रिटायर होने के बाद ढाई महीने तक पोस्टिंग के लिए इंतजार करना पड़ा था। अग्रवाल को रिटायरमेंट के चार महीने पहिले सरकार ने न केवल सूचना आयुक्त का आर्डर निकाल दिया बल्कि वीआरएस लेने का समय भी उनकी इच्छा पर छोड़ दिया। जनवरी में रिटायर होने वाले अग्रवाल ने 23 नवंबर को वीआरएस लिया है। ज्ञातव्य है, सरकार ने एक अघोषित नियम बनाया था कि रिटायरमेंट के दो महीने बाद ही पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग दी जाएगी। आरएस विश्वकर्मा से लेकर राम सिंह तक इसी के तहत पोस्टिंग हुई। लेकिन, अग्रवाल सब पर भारी पड़े।

पहली बॉल पर चौका

लगता है, खेल विभाग में खिलाड़ियों के बीच रहते-रहते आईएएस सोनमणि बोरा को यह गुर पता चल गया है कि किस बॉल को उठाकर मारना है और किसे प्लेट करना है। तभी तो ईरीगेशन संभालते ही उन्होंने पहली बॉल पर चौका जड़ दिया। उन्होंने 14 करोड़ रुपए के विवादास्पद सर्वेश्वर एनई कट के टेंडर को निरस्त करने में देर नहीं लगाई। जबकि, सर्वेश्वर एनई कट पर तत्कालीन इरीगेशन डिपार्टमेंट और ईओडब्लू के बीच तनातनी के हालात निर्मित हो गए थे। इरीगेशन के अफसरों को लेटर लिख कर बिना उनकी इजाजत के ईओडब्लू को कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया था। मुकेश गुप्ता ने इससे नाराज होकर सीएस को पत्र लिख दिया था। बहरहाल, सोनमणि बॉल को समझ गए हैं। जाहिर है, उन्हें अब बैटिंग में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

आखिरी बात हौले से

आदमी की रीढ़ में 33 हड्डियां होती हैं….और सरकारी नौकरी में हर साल उनमें से एक हड्डी टूट जाती है। इसलिए, जो 33 साल से पहिले रिटायर हो जाते हैं, उनकी रीढ़ की कुछ हड्डियां बची होती है। लेकिन, 33 के बाद एक भी हड्डियां नहीं बचती। राजनेता ऐसे अफसरों को अत्यधिक पंसद करते हैं, जिनकी रीढ़ की समूची हड्डियां टूट चुकी हों। क्योंकि, उनसे कुछ भी करा लो…..उन्हें बिछने में दिक्कत नहीं होती।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि आईपीएस मुकेश गुप्ता और जीपी सिंह की जोड़ी हिट होने वाली है?
2. एक सीनियर ब्यूरोक्रेट्स का नाम बताएं, जिन्हें मीटिंगों में जाने से पहिले संवरने में 10 मिनट लगता है?

सीडी….ना बाबा

19 नवंबर
सीडी कांड की जांच सीबीआई के पास आते ही राजधानी में कई लोगों को सांप सूंघ गए हैं। खासकर ऐसे लोग, जो रोज नए सीडी होने के दावे करते थे या फिर मुफ्त के व्हाट्सएप पर इन दावों में पंख लगाते थे। बताते हैं, एक राजनीतिक पार्टी ने दर्जन भर से अधिक सीडी बनवा रखी थी। दो-एक दिन में सीबीआई टीम के धमकने की खबर के बाद अब उसे छत्तीसगढ़ से बाहर भिजवा दिया है। जिनके पास सीडी नहीं थी, वे भी ताव दे रहे थे। अब सभी एक सूर में बोल रहे हैं, सीडी…..ना बाबा, ना….।

डीजीपी और शोले

आईपीएस एएन उपध्याय को डीजीपी बने पौने चार साल से अधिक हो गए हैं। चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड से एक महीने पहिले वे स्टेट पुलिस के चीफ बन गए थे। दोनों इस साल जनवरी, फरवरी में जब तीन साल पूरे किए तो पीएचक्यू के अफसर चुटकी लेते थे…. साब और सीएस साब की होड़ चल रही है। लेकिन, सीएस के रेरा चेयरमैन बनने की खबरें ब्रेक होने के बाद अब लोग कहने लगे हैं…..अपने डीजी साब अब शोले पिक्चर का रिकार्ड ब्रेक करेंगे। शोले मुंबई के मराठा मंदिर में साढ़े पांच साल चली थी। डीजी का भी टेन्योर सवा साल से ज्यादा है….याने सब जोड़े तो साढ़े पांच साल। वास्तव में अगर ऐसा हुआ तो डीजी साब न केवल पुराने डीजीपी विश्वरंजन का रिकार्ड तोड़ेंगे बल्कि शोले का भी। हालांकि, कहने वाले तो यह भी कहते हैं, सरकार किसी भी बनें, डीजी उपध्याय ही रहेंगे। क्योंकि, उनके जैसा अफसर भला मिलेगा कहां….न उधो से लेना और न माधो को देना।

सीएस की क्यूं

अगला चीफ सिकरेट्री अजय सिंह होंगे, इस पर से अब कुहासा छंट चुका है। रेरा की मीटिंग होते ही कभी भी उनकी ताजपोशी हो जाएगी। लेकिन, इस ठाकुर अफसर को टेंशन यह रहेगा कि सीएस की लेन में तीन और आईएएस आकर खड़े हो गए हैं। 87 बैच के तीनों इसी हफ्ते एसीएस प्रमोट हुए हैं। सीके खेतान, आरपी मंडल और बीबीआर सुब्रमण्यिम। जनवरी में वे सीएस बनने के लिए आईएएस में जरूरी 30 साल पूरा कर लेंगे। हालांकि, इसमें टाईम कंसीडर करना सरकार पर निर्भर करता है। एएन उपध्याय को 29 साल में ही सरकार ने डीजीपी अपाइंट कर दिया था। ऐसे में, अजय सिंह को सीएस बनने के बाद भी टेंशन बना रहेगा।

मेरिट लिस्ट

पिछले हफ्ते एक नेताजी की बंगले पर एक महिला नेत्री कोई काम लेकर पहुंची। आवेदन को मार्क करने के बाद नेताजी ने पूछा, और तो सब ठीक है न! नेत्री ने अपना दुखड़ा सुना दिया….भाई साब, इस जमाने में हमारे जैसों की कोई पूछ नहीं है….जो हवा-हवाई काम कर रही हैं, उन्हें ही अहम पद मिलते जा रहे हैं। नेताजी ने चुटकी के अंदाज में कहा, तुम भी जमाने के हिसाब से क्यों नहीं चलती। महिला नेत्री ने जो जवाब दिया, वह न केवल आपको हिला देगी बल्कि राजनीति में महिलाओं की क्या स्थिति है, यह साफ हो जाएगा। उसने कहा, भाई साब! जमाने के हिसाब से चलने के लिए मैं तैयार हूं….लेकिन, उसमें भी वेटिंग है….मेरा नम्बर लग पाएगा कि नहीं….भरोसा नहीं। जवाब सुनकर नेताजी भी सन्न रह गए।

अमित कुमार की वापसी

सब कुछ ठीक रहा तो अगले महीने के मध्य तक आईपीएस अमित कुमार सीबीआई डेपुटेशन से छत्तीसगढ़ लौट सकते हैं। हालांकि, उनका डेपुटेशन पीरियड पिछले साल सितंबर में समाप्त हो गया था। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई के ओआईसी होने के चलते वे रिलीव नहीं हो पा रहे थे। मगर अब जो संकेत मिल रहे हैं, उनका लौटना लगभग तय हो गया है। और, इसके साथ ही रायपुर का आईजी बनना भी।

केडीपी भी एसीएस

87 बैच के आईएएस के एडिशनल चीफ सिकरेट्री बनने के बाद अब 88 बैच के केडीपी राव के भी एसीएस बनने का रास्ता जल्द ही साफ हो जाएगा। विवेक ढांड के रिटायर होने के बाद खाली हुए पद पर केडीपी का प्रमोशन हो सकता है। केडीपी लंबे समय से मंत्रालय से बाहर हैं। बिलासपुर कमिश्नरी का चक्कर लगाते हुए व ेअब रेवन्यू बोर्ड पहुंच गए हैं। उनके शुभेच्छु इस उम्मीद में थे कि किसी सीनियर आईएएस के दिन खराब हों तो राव साब को मुक्ति मिलें। लेकिन, ऐसा हुआ नहीं। विवेक ढांड, अजय सिंह की हथेली में उपर वाले ने ऐसी लकीरें खींच कर भेजी है कि लोग टकटकी लगाए बैठे रह गए।

बीजेपी की चुनौती

कांग्रेस की सभाओं में उमड़ती भीड़ से बीजेपी के रणनीतिकारों के कान खडे़ हो गए हैं। खासकर, सीडी कांड के बाद पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की पदयात्राओं में जिस तरह से हुजूम एकत्र हुआ है। जबकि, सीडी कांड के बाद माना जा रहा था, भूपेश की स्थिति कमजोर हुई है…..पार्टी में वे अकेला पड़ते जा रहे हैं। लेकिन, पदयात्रा में सभी जगहों पर अपेक्षा से कहीं अधिक भीड़ जुटाने में कांग्रेस पार्टी कामयाब रही। ऐसे में, बीजेपी के साथ ही कांग्रेस के असंतुष्ट नेताओं की चिंता लाजिमी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. किस मंत्री के बारे में कहा जाता है कि वे कांग्रेस की टिकिट तय करते हैं?
2. रेड़ा का पेड़ा देने में सरकार अफसरों को क्यों ललचा रही है?

सीडी का सच!

12 नवंबर
सेक्स सीडी की थ्योरी अंदरखाने से निकलकर बाहर आ रही है, उसके अनुसार सीडी बनाने वालों ने एक तीर से कई शिकार किए। विरोधियों को ठिकाने लगाया, वहीं बड़ी रकम पर भी हाथ साफ किया। इस फिल्म का सबसे सस्पेंस सीन रहा, 12 घंटे के भीतर असली सीडी का पता लगा लेना। जबकि, इंडियन पोर्न की बात करें तो नेट पर 50 लाख से अधिक स्लाट होंगे। ऐसे में, रायपुर पुलिस क्या, अमेरिका की पुलिस भी 12 घंटे में इसका पता नहीं लगा सकती थी। असली सीडी की गारंटी सिर्फ एक आदमी के पास थी, जिसने टेम्पर्ड किया होगा। आखिर, असली से ही तो उसने नकली बनाई होगी। और, जिस सच की सत्ता के गलियारों में चर्चा बड़ी तेज है, वह इसी से मेल खाती है। बताते हैं, रायपुर के प्रख्यात सीडी निर्माता ने एक राजनीतिक दल से सौदा करके सीडी टिकाया था। उसी ने सियासी तूफान उठने पर असली सीडी लोगों को मुहैया कराने में देर नहीं लगाई। इससे उसे तीन फायदे हुए। पहले सौदे से भी उसे काफी कुछ मिला। दूसरा, मंत्री को वॉट लगाया। और, तीसरा असली सीडी के एवज में कई खोखा लिया। दरअसल, मामला ही ऐसा था, इस विपदा से बचने तो आदमी अपना घर-द्वार तक बेच डाले।

सीडी में भी जातिवाद

रायपुर के मशहूर सीडी निर्माता ने अनेक राजनेताओं की सीडी बना रखी है। कुछ असली है तो कुछ मंत्री टाईप्ड टेम्पर्ड। बताते हैं, सबसे पहिले बीजेपी के एक नेता की सीडी बाहर लाने के लिए प्लान किया गया था। लेकिन, एक राजनीतिक पार्टी ने उसे देखने के बाद लेने से इंकार कर दिया। बताते हैं, वो जातभाई की सीडी थी। फिर, दूसरी सीडी राजेश मूणत की दिखाई गई। यह सीडी जंच गई। फिर, इसका सौदा हो गया।

धर्मसंकट-1

सेक्स सीडी कांड से अपने मंत्री को उबारने को लेकर सत्ताधारी पार्टी धर्मसंकट में पड़ गई है। दरअसल, राजनेताओं का चरित्र ही ऐसा हो गया है कि सीडी कांड की असलियत सामने आ जाने के बाद भी अधिकांश लोग मानने के लिए तैयार नहीं हैं कि सीडी टेम्पर्ड है। और सही भी है, 13 मिनट की असली सीडी देखे बगैर वास्तविकता का पता चलता नहीं। और दिक्कत है, सत्ताधारी पार्टी आम लोगों के बीच असली सीडी का वितरण कर भी नहीं सकती। बीजेपी की एक कम महत्व की मीटिंग में एक नेता ने चुटकी ली….सीडी लोगों को दिखानी पड़ेगी। लेकिन, इसका विरोध हो गया….लोग कहेंगे, बच्चों के साथ अधेड़ लोगों को भी बिगाड़ने का काम कर रही है बीजेपी।

धर्मसंकट-2

सरकार ने आईजी एसआरपी कल्लूरी को पोस्टिंग देकर डीजीपी एएन उपध्याय का बड़ा धर्मसंकट दूर कर दिया है। कल्लूरी फरवरी में बस्तर आईजी से हटने के बाद बिना विभाग के थे। हालांकि, इस दौरान वे लंबे लीव पर रहे। किडनी ट्रांसप्लांट कराकर पिछले 18 अक्टूबर को वे रायपुर लौट आए थे। उन्होंने फेसबुक पर लिखा भी था, वे अब एकदम फिट हैं….डाक्टरों ने सामान्य रूप से उन्हें कार्य करने के लिए फ्री कर दिया है। इसके बाद भी सरकार ने कोई विभाग नहीं दिया था। इधर, दिसंबर भी सामने आ गया है। लास्ट मंथ में एसीआर लिखा जाता है। कल्लूरी डीजीपी के प्रिय अफसर हैं। जाहिर है, डीजीपी धर्मसंकट में तो होंगे ही, बिना विभाग के कल्लूरी का वे एसीआर कैसे लिख पाएंगे।

पॉलीटिकल माइलेज

बहुत कम लोगों को मालूम है, राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद गिरौधपुरी खुद की इच्छा से गए थे। राष्ट्रपति भवन से जब लेटर आया तो अफसरों ने इसे अनमने ढंग से लिया। वजह यह थी कि प्रेसिडेंट विजिट में सिक्यूरिटी के साथ ही तामझाम काफी होता है। लिहाजा, राष्ट्रपति राज्यों की राजधानी से बाहर बड़े कम ही जा पाते हैं। लेकिन, गिरौधपुरी में जब लोगों की भीड़ उमड़ी तो सरकार आवाक रह गई। करीब एक लाख लोग। सरकार इसलिए हैरान थी कि बलौदाबाजार, महासमुंद और जांजगीर के कलेक्टरों को भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन, जिस हिसाब से गाड़ियां लगाई गई थीं, बहुत होता तो 40-50 हजार से अधिक लोग नहीं आते। बताते हैं, सरकारी मशीनरी से ज्यादा प्रभावशाली रही दलित समाज में गर्वान्वित होने की अनुभूति। राष्ट्रपति दलित समुदाय से आते हैं। फिर, पहली बार राष्ट्रपति गिरौधपुरी आ रहे थे। इसलिए, जिस बस में 40 आदमी बैठने की क्षमता थी, उसमें 100-100 लोग ठूंसा गए। जाहिर है, इससे पालीटिकल माइलेज भाजपा को मिला।

रीना और राजेश

प्रेसिडेंट विजिट में बढ़ियां काम करने के लिए पीएस टू सीएम अमन सिंह ने सिकरेट्री के व्हाट्सएप ग्रुप में सबको थैंक्स किया। लेकिन, नाम लिखे सिर्फ दो के। ट्राईबल विभाग की हेड रीना कंगाले और डीपीआर राजेश टोप्पो के। रीना ने गिरौधपुरी में आउटस्टैंडिंग वर्क किया। तो वहीं, राजेश ने ऐसा काम किया कि राष्ट्रपति भी हैरान रह गए। गिरौधपुरी के 25 मिनट पहले की फोटो मंगाकर उसे एलबम में सजाकर एयरपोर्ट भिजवा दिया। ऐसे में राजेश का नम्बर तो बढ़ना ही था। हालांकि, तारीफ तो अमन िंसंह को भी मिली। राष्ट्रपति के सिकरेट्री ने अमन सिंह को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ में राष्ट्रपति के सफल कार्यक्रम के लिए एप्रीसियेट किया।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डेपुटेशन से छत्तीसगढ़ लौट रहे आईएएस गौरव द्विवेदी क्या अगला हेल्थ सिकरेट्री होंगे?
2. पीएल पुनिया से यह आग्रह करके कि आप कांग्रेस नेताओं को एक कर दीजिए, चरणदास महंत ने जाहिर कर दिया कि कांग्रेस नेता एक नहीं हैं?

धमाकों का नवंबर?

5 नवंबर
धमाकों का नवंबर?
नवंबर ब्यूरोक्रेसी के लिए धमाकों का महीना हो सकता है। वैसे भी, मंथ शुरू होने से एक रोज पहिले सरकार ने कई विभागों के सचिवों को बदल दिया। जिन्होंने सपने में भी नहीं सोचा, उनका प्रमोशन हो गया। अब राज्योत्सव के बाद देखते जाइये….क्या-क्या होता है। अगले हफ्ते रेरा चेयरमैन के लिए कमिटी की बैठक हो सकती है। रेरा चेयरमैन की शर्तों के अनुसार सलेक्ट आफिसर को सरकारी पद छोड़ना होगा। चीफ सिकरेट्री होने के नाते विवेक ढांड स्वाभाविक तौर पर इस पोस्ट के मजबूत दावेदार हैं। सूचना आयोग की बात अलग थी। रेरा प्रधानमंत्री का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इसका गठन न होने से रियल इस्टेट का काम भी गड़बड़ा रहा है। फिर, रेरा कमिटी में हाईकोर्ट के जस्टिस भी मेम्बर हैं। लिहाजा, सूचना आयोग जैसा भी नहीं किया जा सकता कि अपाइंट कर दिए, ज्वाइनिंग बाद में होगी। ऐसे में, प्रशासनिक हल्को में मेजर चेंज होना तय माना जा रहा है। 87 बैच के तीनों आईएएस इस महीने एसीएस बन सकते हैं। इसी महीने कद्दावर आईएएस एमके राउत भी सेवानिवृत्त होंगे। राउत की छबि न केवल एक दबंग नौकरशाह की है बल्कि रिजल्ट देने वाले आईएएस के रुप में जाने जाते हैं। सरकार को टाईम पीरियड में कोई काम करना होता था, तो जेहन में एकमात्र नाम आता था….राउत का। यह शायद अतिश्योक्ति नहीं होगी कि सुनिल कुमार के रिटायर होने के बाद किसी अफसर के हटने से ब्यूरोक्रेसी में वैक्यूम आएगा….सचिवालय हल्का लगेगा, तो वे राउत ही हैं। इससे इतर खबर है, सरकार आईपीएस लेवल पर भी एक अहम सर्जरी करने का खाका बना रही है। इसमें कुछ दिग्गज आईपीएस निबट सकते हैं। आईएफएस में पीसीसीएफ भी इसी महीने रिटायर होंगे। जाहिर है, 30 नवंबर को नए पीसीसीएफ का भी ऐलान हो जाएगा।

चेहरा और चरित्र

ब्यूरोक्रेसी के भावी निजाम की चाल भले ही बहुत तेज ना हो, मगर चेहरा और चरित्र पर एतबार किया जा सकता है। हालांकि, इससे पहिले के दो चीफ सिकरेट्री…..अशोक विजयवर्गीय और पी जाय उम्मेन भी चाल में तेज नहीं थे। उम्मेन के जमाने में फाइलों की धीमी रफ्तार पर लोग खूब चटखारे लेते थे। लेकिन, दोनों ने अपना चेहरा और चरित्र बेदाग रखा। विजयवर्गीय और उम्मेन जैसे बे-चाल अफसरों ने भी चीफ सिकरेट्री की गरिमा कम नहीं होने दी। भावी सीएस की छबि प्रिंस वाली जरूर रही है…मगर उनका कोई दीगर काम-धाम नहीं है। इसलिए, साफ-सुथरे प्रशासन की उम्मीद की जा सकती है।

राउत और मंडल का मिथक

सरकार ने एमके राउत के रिटायर होने के बाद आरपी मंडल को नेक्स्ट रुरल डेवलपमेंट सिकरेट्री बनाने का आदेश जारी कर दिया है। 1 नवंबर को मंडल दूसरी बार ग्रामीण एवं पंचायत विभाग संभालेंगे। मंडल की पोस्टिंग से ब्यूरोक्रेसी की इस मिथक पर सरकार ने मुहर लगा दिया है कि राउत का विभाग मंडल को मिलता है। इससे पहिले मंडल को राउत से ही लेबर मिला था। सिर्फ लेबर ही नहीं, मंडल ने रेवन्यू, फॉरेस्ट, स्कूल एजुकेशन, ट्राईबल, पीडब्लूडी, अरबन एडमिनिस्ट्रेशन किया है। ये सभी डिपार्टमेंट राउत के पास रहे हैं। राउत को पंचायत दूसरी बार मिला तो अब मंडल को सरकार ने फिर से यह विभाग सौंप दिया है। ये अलग बात रही कि राउत की किस्मत ने साथ नहीं दिया। टाईम कम होने और विवेक ढांड के क्रीज पर जम जाने के चलते उन्हें चीफ सिकरेट्री बनने का मौका नहीं मिल पाया। अब ब्यूरोक्र्रेसी में उत्सुकता है कि राउत और मंडल का मिथक आगे भी कायम रहेगा या फिर मंडल इसे तोड़ कर चीफ सिकरेट्री बनने में कामयाब होंगे।

जय गणेश देवा!

सरकार ने पहली बार नौकरशाहों को दोनों हाथ से दिया….छह सिकरेट्रीज 14 महीने पहिले प्रिंसिपल सिकरेट्री बन गए। दीगर राज्यों में भी शायद ही ऐसा कभी हुआ हो। सरकार बहुत खुश होती है तो छह महीना, साल भर पहले प्रमोशन दे देती है। लेकिन, अबकी विकास शील, निधि छिब्बर, रीचा शर्मा, मनोज पिंगुआ, निवर्तमान आईएएस गणेश शंकर मिश्रा की तो लाटरी ही निकल पड़ी। लेकिन, सरकार को इसका क्रेडिट नहीं मिला। पूरा श्रेय गणेश शंकर मिश्रा लूट ले गए। जिन अफसरों को पीएस बनाया गया है, उनमें सिर्फ अमित अग्रवाल अगले साल जनवरी में प्रमोट हो जाते। लेकिन, बाकी का नम्बर 2019 में आता। अव्वल, ये सभी डायरेक्ट आईएएस हैं। ये सभी अब, जय गणेश देवा….कर रहे हैं। दरअसल, गणेश शंकर का लिस्ट में आखिरी नाम था। उपर वालों का प्रमोशन दिए बिना गणेश शंकर का नम्बर लगता नहीं। अफसरों को लग रहा है….गणेशजी के चक्कर में हम सभी गंगा नहा लिए। ऐसे में, जय गणेश देवा तो बनता ही है….।

मैं भी सीडी

सीडी पर उठे सियासी तूफान के बीच कांग्रेस के बड़े नेता चरणदास महंत कांग्रेस भवन में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल से मुलाकात करके बाहर निकल रहे थे। मीडिया वालों ने उनसे पूछ लिया, महंतजी, सीडी पर कुछ बोलिये! महंत बोले, मैं खुद सीडी हूं….सीडी पर क्या बोलूं….चीर परिचित ठहाका लगाते हुए गाड़ी में बैठ गए। जाहिर है, चरणदास को शार्ट में लोग दाउ या सीडी कहते हैं।

हिट विकेट!

आईएएस अविनाश चंपावत हिट विकेट होकर सरगुजा चले गए। सरगुजा जाने का मतलब है कि विधानसभा चुनाव से पहिले वहां से लौटने का कोई चांस नहीं। 2003 बैच के चंपावत रेगुलर रिक्रूट्ड आईएएस हैं। चंपावत पर सरकार की भृकुटी इसलिए चढ़ी कि उनका अपने अफसरों के साथ टकराव शुरू हो गया था। बताते हैं, बात कोई बड़ी नहीं थी। सीनियर ब्यूरोक्रेट्स या आईएएस एसोसियेशन चाहता तो समझा-बूझाकर इस अप्रिय एपीसोड को समाप्त करा सकता था। इससे सरकार की भी किरकिरी नहीं होती। मगर तरकश के सवालों पर मंत्रालय में त्राहि माम मचा देने वाले ब्यूरोक्रेट्स अपने साथी को हिट विकेट हो जाने दिया। वैसे, छोटे-छोटे कारपोरेट हाउसों में एचआर डिपार्टमेंट होता है। एचआर अपने लोगों के प्राब्लम का पता लगाकर उसे शार्ट आउट करने का प्रयास करता है ताकि हाउस काम प्रभावित न हो। जीएडी का भी काम भी एचआर की तरह ही होता है। लेकिन, ब्यूरोक्रेसी में आक्व्ड सिचुऐशन क्यों निर्मित हो रहा है, जीएडी के पास इसके लिए फुरसत नहीं है।

स्पेशल सिकरेट्री ओरियेंटेड

सरकार ने दो और स्पेशल सिकरेट्री को विभागों की कमान सौंप दी है। प्रसन्ना आर को स्पेशल सिकरेट्री समाज कल्याण, युवा एवं खेल तथा संगीता आर को लेबर का स्वंतत्र प्रभार ही नहीं बल्कि लेबर कमिश्नर का दायित्व भी सांप दिया है। संगीता को तो सरकार ने जबर्दस्त कद बढ़ाया है। लेबर में अब तक प्रिंसिपल सिकरेट्री से नीचे कभी कोई अफसर नहीं रहा। नारायण सिंह से लेकर विवेक ढांड, एमके राउत, आरपी मंडल, केडीपी राव जैसे सीनियर आफिसर लेबर संभाल चुके हैं। उससे पहिले मूर्ति और राबर्ट हरंगडौला भी पीएस लेवल के थे। ढांड और राउत तो एसीएस रहे। सरकार ने ऐसे विभाग में कई बड़े अफसरों को नजरअंदाज करते हुए संगीता पर भरोसा जताया है तो उनके लिए यह बड़ी बात होगी। बहरहाल, मंत्रालय में फुलफ्लैश विभाग संभालने वाले स्पेशल सिकरेट्री की संख्या बढ़कर अब आठ हो गई है….डा0 कमलप्रीत सिंह, डा0 रोहित यादव, सिद्धार्थ कोमल परदेशी, रीना बाबा कंगाले, प्रसन्ना, मुकेश बंसल, राजेश सुकुमार टोप्पो और संगीता।

जोर का झटका

पोर्न स्टार सनी लियोनी कंसर्ट के आयोजकों को रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने जोर का झटका बड़े धीरे से दिया। 3 नवंबर को आयोजक यह मान लिए थे कि अब विरोध खतम हो गया है। यही सोचकर पासों का बंडल लेकर ओपी के पास पहुंचे। प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं, पास लेने से ओपी ने मुस्कुराते हुए मना कर दिया….कार्यक्रम मेंं जाने का मेरे पास समय कहां होता है। आयोजक बोले, साब…अब कोई विरोध नहीं करेगा….बात हो गई है, मीडिया में भी अब कुछ नहीं आएगा। ओपी ने कहा, मैं देखता हूं। आयोजक बेफिकर होकर निकले, पीछे से एडीएम का आर्डर निकल गया, अनुमति नही मिलेगी।

अंत में दो सवाल आपसे

1. सत्ता के गलियारों में किस…..भाभी की चर्चा बड़ी तेज है, जो आईएएस अफसरों को नचा भी रही है और भिड़ा भी रही….?
2. कटप्पा ने बाहुबलि को क्यों मारा, बाहुबलि-2 में इसका जवाब मिल गया….लेकिन, सेक्स सीडी एपीसोड में 12 घंटे के भीतर असली सीडी किसने और कैसे ढूंढ़ निकाली….इसे कोई बताएगा?

रविवार, 29 अक्तूबर 2017

मूणत की असली कमाई!

29 अक्टूबर
छह हजार करोड़ रुपए के बजट वाले पीडब्लूडी विभाग और बोरियों में रुपिया आने वाले ट्रांसपोर्ट विभाग का मंत्री रहते हुए राजेश मूणत ने 14 बरस में क्या कुछ किया, पता नहीं। मगर एक कमाई तो उन्होंने अवश्य की, वह सरकार और संगठन का विश्वास जीतने की। सेक्स सीडी कांड में जिस तरह मूणत के समर्थन में सरकार, संगठन और ब्यूरोक्रेट्स खड़े हुए….भाजपा के लोग भी हैरान हैं। पार्टी मुख्यालय में 27 अक्टूबर की शाम एक कार्यक्रम में एक सीनियर मंत्री का साथी मंत्री से बात करते हुए दर्द छलक आया….मेरे समय एक आदमी सामने नहीं आया और आज राजेश के पक्ष में पूरी पार्टी आ गई है। बात सही भी है….याद होगा, राष्ट्रीय संगठन मंत्री होने के बाद भी संजय जोशी आखिर सेक्स कांड में न केवल अकेले पड़ गए थे, बल्कि उनका कैरियर भी खतम हो गया। एमपी के राघवजी का मामला तो हाल का है। ऐसे ही एक मामले में राघवजी को फ्लैट का ताला तोड़कर पुलिस ने गिरफ्तार किया था। लेकिन, मूणत को बचाने के लिए सरकार के रणनीतिकार रात भर जागकर आपरेशन विनोद वर्मा की मानिटरिंग करते रहे। अगले दिन दोपहर पार्टी अध्यक्ष के साथ आधा दर्जन मंत्री थाना पहुंच गए। मूणत की असली कमाई शायद यही होगी।

भूपेश की होशियारी

सेक्स सीडी कांड में पीसीसी चीफ भूपेश बघेल द्वारा हड़बड़ी में बुलाई गई प्रेस कांफें्रस में जिस तरह उन्होंने होशियारी बरतते हुए मंत्री का नाम नहीं लिया, यहीं से शक की सुई घूमनी शुरू हो गई थी। जांच एजेंसियों के भी कान खड़े हो गए कि भूपेश जैसे अग्रेसिव लीडर मंत्री का नाम लेने में आखिर क्यों हिचक रहे हैं। इसे ही अहम सूत्र मानते हुए पुलिस आगे बढ़ी। और, मंत्री राजेश मूणत के प्रति लोगों को लग रहा था कि मामले में कुछ गड़बड़ है।

नए सीएस की ट्रेनिंग?

बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद 83 बैच के आईएएस अजय सिंह का अगला चीफ सिकरेट्री बनना लगभग तय है। लेकिन, पोस्टिंग कब होगी, सरकार इस पर से पर्दा नहीं उठा रही है। विवेक ढांड मार्च तक अपना कार्यकाल पूरा करेंगे या फिर…..। ढांड ने हाल ही में पी जाय उम्मेन का सर्वाधिक समय तक सीएस रहने का रिकार्ड ब्रेक किया है। बहरहाल, आजकल सरकारी कार्यक्रमों में एडिशनल चीफ सिकरेट्री अजय सिंह की सक्रियता बढ़ गई है। सरकारी खरीदी के लिए जेम पोर्टल के एमओयू में उन्हें चीफ सिकरेट्री के बगल में बिठाया गया। जबकि, यह विशुद्ध रुप से इंडस्ट्री डिपार्टमेंट का प्रोग्राम था। अजय सिंह के खेती-किसानी वाली विभाग से इसका कोई ताल्लुकात नहीं था। न ही उनके अलावा कोई दीगर एसीएस थे। जेम के इस प्रोग्राम के बाद ब्यूरोक्रेसी में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि सरकार अगले चीफ सिकरेट्री के रूप में अजय सिंह को ट्रेंड कर रही है। ये अलग बात है कि कलेक्टर कांफ्रेंस में मुख्यमंत्री साफ कर चुके हैं कि सीएस अभी रिटायर नहीं हो रहे हैं। लेकिन, लोगों के पास इसका भी जवाब है….राजनीतिज्ञों के हर हां में ना छिपा होता है।

पीएचक्यू का सेंशर

24 अक्टूबर के एसपी कांफ्रेंस के बाद कई पुलिस अधीक्षक दुखी हैं। उनके कामों को जिस ढंग से प्रेजेंट किया जाना था, नहीं किया गया या उसे सेंशर कर दिया गया। दरअसल, पुलिस मुख्यालय में सीएम के समक्ष प्रेजेंटेशन दिया जाना था, इसलिए जिलों से पुलिस की उपलब्धियां मंगाई गई थीं। आरोप है कि मुख्यालय के सीनियर अफसरों ने कई एसपी के कामों को सेंशर करते हुए अपने चहेते पुलिस अधीक्षकों के काम को सीएम के सामने बढ़ा-चढ़ा कर पेश कर डाला। अगर ऐसा है तो एसपीज का दुखी होना लाजिमी है।

शरारत की पोस्टिंग

व्हाट्सएप ग्रुपों में हफ्ते भर से एसपी की पोस्टिंग की लिस्ट मूव हो रही है। इसके अनुसार बिलासपुर, रायपुर, महासमुंद, रायगढ़, राजनांदगांव, दुर्ग, अंबिकापुर, जांजगीर, बालोद में नए एसपी के बकायदा नाम और जिला लिखा हुआ है। जाहिर है, जिनके नाम ट्रांसफर लिस्ट में वायरल हो रहे हैं, उनके हर्ट बिट्स बढ़े हुए हैं। लेकिन, वास्तव में ऐसा कुछ है नहीं। सिवाय फेक मैसेज के। सरकार में आईएएस, आईपीएस लेवल पर इस तरह ऐलान कर या किसी को बता कर ट्रांसफर नहीं किए जाते। वो भी 15 साल वाली सरकार में। बोनस तिहार, सेक्स सीडी और राज्योत्सव में व्यस्त सरकार के पास अभी इस पर सोचने के लिए वक्त नहीं है।

एक और सिकरेट्री की बिदाई

इरीगेशन सिकरेट्री गणेश शंकर मिश्रा 31 अक्टूबर याने सोमवार को रिटायर हो जाएंगे। मिश्रा के रिटायर होने के बाद सिकरेट्री लेवल पर एक और आईएएस की कमी हो जाएगी। जाहिर है, छत्तीसगढ़ में सिकरेट्री लेवल पर अफसरों पर काफी टोटा है। अफसर या तो रिटायर होते जा रहे हैं या फिर सरकार के मापदंड पर अनफिट हैं। लिहाजा, स्पेशल सिकरेट्री लेवल के आईएएस को सिकरेट्री की कमान दी जा रही है। अब देखना है, गणेश शंकर के बाद इरीगेशन का चार्ज किसी सीनियर सिकरेट्री को दिया जाता है या फिर किसी नए को अजमाया जाएगा।

नया पीसीसीएफ

प्रधान मुख्य वन संरक्षक आरके टम्टा 30 नवंबर को रिटायर हो जाएंगे। याने सिर्फ महीने भर बाद। टम्टा के रिटायरमेंट की चर्चा के साथ ही नए पीसीसीएफ के लिए वन महकमे में जोर आजमाइश शुरू हो गई है। टम्टा के बाद दो आईएफएस के नाम प्रमुखता से चल रहे हैं। पहला आरके सिंह और दूसरा, मुदित कुमार। आरके सिंह फिलहाल पीसीसीएफ वाईल्डलाइफ हैं और मुदित कुमार पीसीसीएफ लघु वनोपज संघ।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री को छह महीने का एक्सटेंशन देने की खबर प्लांट करने के पीछे क्या उद्देश्य हो सकते हैं?
2. सीडी कांड में सीबीआई जांच के ऐलान होने के बाद क्या पीसीसी चीफ भूपेश बघेल की मुश्किलें बढ़ सकती हैं?

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अप्रिय एपीसोड

22 अक्टूबर
संजय दीक्षित
रायपुर के एक बेहद छोटे से पोस्ट असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी पर कार्रवाई को लेकर सरकार से लेकर ब्यूरोक्रेसी तक उलझ गई है। शोयब को सीएम के फंक्शन से गायब रहने पर प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल ने सस्पेंड किया था। इसके लिए उन्होंने नोटशीट भेजकर सीएम से बकायदा अनुमोदन लिया था। लेकिन, पहले तो लेबर मिनिस्टर भैयालाल राजवाड़े ने मंडल को न केवल नोटिस थमा दी बल्कि अफसर का निलंबन भी अवैध करार दिया। चूकि, कार्रवाई के लिए हरी झंडी सीएम ने दी थी, लिहाजा सरकार हरकत में आई और अफसर के सस्पेंशन के लिए मंत्रालय से आर्डर जारी किया गया। मंत्रालय का आदेश मिलते ही रायपुर कलेक्टर ओपी चौधरी ने डिप्टी कलेक्टर सीमा ठाकुर को असिस्टेंट लेबर कमिश्नर का चार्ज सौंप दिया। लेकिन, लेबर कमिश्नर अविनाश चंपावत को यह नागवार गुजरा। बताते हैं, लेबर एक्ट के अनुसार डिप्टी कलेक्टर को यह चार्ज नहीं दिया जा सकता। लिहाजा, लेबर कमिश्नर ने डिप्टी कमिश्नर की पोस्टिंग को खारिज कर दिया। सरकार के अफसरों में इस तरह टकराव से मैसेज अच्छा नहीं गया है। सड़क पर इस तरह टकराव को आखिर अराजकता ही तो कहा जाएगा।

वाह विधायकजी!

सरगुजा के एक विधायक को सत्ता के मद में थानेदार से फोन पर दुर्व्यवहार करना महंगा पड़ गया। बताते हैं, विधायक ने थानेदार को किसी मुजरिम को छोड़ने के लिए कहा था। थानेदार ने नहीं सुनी। इस पर नेताजी भड़क गए….फोन पर अ-शालीन शब्दों की बरसात कर डाली। विधायकजी को पता नहीं था कि उनका फोन टेप हो रहा है। थानेदार ने जिले और सरगुजा रेंज के सीनियर अफसरों को वह टेप सुनवा दिया। पुलिस अधिकारियों ने नेताजी को बुलवाकर जब टेप सुनवाया तो उनकी हालत पूछिए मत! उन्होंने सीनियर अफसरों के सामने हाथ ही नहीं जोड़ा बल्कि थानेदार से भी माफी मांगने में देर नहीं लगाई।

सकते में भूपेश खेमा

कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ एवं गंभीर नेता मोतीलाल वोरा के तेवर से पूरी कांग्रेस पार्टी सकते में है। पार्टी प्रभारी पीएल पुनिया के ऐलान के बाद भूपेश बघेल की दोबारा ताजपोशी एकदम तय मानी जा रही थी। लेकिन, वोरा ने यह कहकर कि भूपेश अभी पीसीसी चीफ है…आगे कौन होगा, नहीं बता सकता….कांग्रेस में खलबली मचा दी है। वोरा गुट ने जिस तरह से अबकी दिवाली मनाने आए वोराजी के स्वागत में शक्ति प्रदर्शन किया, उससे भी भूपेश खेमा हैरान है। स्वागत ऐसा हुआ, वोरा को एयरपोर्ट से राजधानी के गीतानगर बंगले में पहुंचने में ढाई घंटे से अधिक समय लग गए।

तीन दिन टाईट

मंत्री से लेकर सूबे के कलेक्टर, एसपी के लिए 22 से लेकर 24 अक्टूबर तक बड़ा टाईट रहने वाला है। 22 को बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक है। इसमें बताते है, मंत्रियों से पूछा जाएगा कि पार्टी प्रमुख अमित शाह के निर्देशों का वे कितना पालन कर रहे हैं। वहीं, 23 को कलेक्टर और 24 को एसपी कांफ्रेंस है। दोनों दिन कांफें्रस में सीएम दिन भर रहेंगे। जाहिर है, अब सरकार रिव्यू के लिए कलेक्टर्स, एसपी को तलब कर रही है तो टेंशन तो रहेगा ही।

एसपी के लिए सेपरेट टाईम

पिछले 9 एवं 10 जनवरी को कलेक्टर्स, एसपी कांफ्रेंस में एसपी का अलग से रिव्यू नहीं हुआ था। अलबत्ता, 10 को दोनों को एक साथ बिठाया गया। इस बार 24 को फर्स्ट हाफ में कलेक्टर्स, एसपी की सीएम ज्वाइंट मीटिंग लेंगे। इसके बाद सेकेंड हाफ में सिर्फ एसपी का रिव्यू होगा। एसपी का इसलिए अलग से रखा गया है क्योंकि, कलेक्टर्स के साथ एक तो एसपीज को टाईम नहीं मिलता। और, फिर कलेक्टरों के सामने खुलकर वे अपनी बात नहीं रख पाते। सो, तय किया गया है कि एसपी को एक हाफ अलग से दिया जाए। हालांकि, अच्छा होता कि एसपी को फर्स्ट हाफ में रखा जाता। दो साल पहले भी एसपी को अलग से बिठाया गया था। लेकिन, दिन भर कलेक्टर्स कांफ्रेंस में सरकार इतनी थक गई थी कि एसपी के साथ मीटिंग भाषणों में सिमट गई थी।

सरकार पर प्रेशर

11 साल बाद राज्योत्सव में फिर से राष्ट्रपति आ रहे हैं। सात नवंबर को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद समापन समारोह के चीफ गेस्ट होंगे। इससे पहिले 2006 में तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे कलाम आए थे। समापन समारोह में राष्ट्रपति दो दर्जन से ज्यादा राज्य सम्मान भी प्रदान करेंगे। राष्ट्रपति के हाथों सम्मान मिलना है, इसलिए सरकार पर प्रेशर तेज हो गए हैं। पुरस्कारों के लिए चौतरफा फोन आ रहे हैं। लेकिन, सरकार के सामने दिक्कत यह है कि 17 सालों में सभी ठीक-ठाक लोगों को पुरस्कार मिल गए हैं। अब जो नाम आ रहे हैं, सरकार के सामने माथा सिकोड़ने के अलावा कोई चारा नहीं है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डेढ़ साल से किसी खास मकसद के लिए मुख्य सूचना आयुक्त की कुर्सी रिजर्व रखने के बाद सरकार अब किस उलझन में फंस गई है?
2. किस आईएएस पर सरकार की भृकुटी तनी है….हो सकता है, जल्द ही उसका बुरा समय आ जाए?

मंत्री से तगादा

15 अक्टूबर
सूबे के एक मंत्री ने 10 पेटी में एक आफिसर का ट्रांसफर किया। लेकिन, तबादले का आर्डर निकलते ही अफसर पर गाज गिर गई। कार्रवाई उपर से हुई है, इसलिए मन को मसोसने के अलावा मंत्रीजी कुछ कर भी नहीं सकते। अफसर अब मंत्रीजी से तगादा कर रहा है, साब मैं तो निबट गया। आपके बेटे को जो दिया था, उसे लौटवा दीजिए। लेकिन, मंत्रीजी कम थोड़े ही हैं। साफ कह दिया….तुम्हारा काम तो मैं करा ही दिया था….तुम्हारी किस्मत ही खराब निकली तो मैं क्या कर सकता हूं।

5 साल में 6 कलेक्टर

कोंडागांव ने कलेक्टर बदलने के मामले में नया रिकार्ड कायम किया है…..शायद देश में भी यह पहला भी हो। वहां पांच साल में छह कलेक्टर बदले हैं। नवंबर 2012 में हेमंत पहाडे को कोंडागांव से हटाया गया था। उनके बाद विजय धुर्वे, धनंजय देवांगन, शिखा राजपूत, समीर विश्नोई और अब नीलकंठ टेकाम। याने हर 10 महीने में एक कलेक्टर बदल गए।

अभी और होंगे चेंज

सरकार ने 12 अक्टूबर को कोंडागांव कलेक्टर समीर विश्नोई को हटाकर राप्रसे से आईएएस बने नीलकंठ टेकाम को वहां की कमान सौंप दी। लोगों को भले ही यह अप्रत्याशित लगा हो मगर ये तो होना ही था। समीर ही नहीं, अगले दो-तीन महीने में इसी तरह एक-एक, दो-दो करके छह-से-सात जिलों के कलेक्टर बदलेंगे। 23 अक्टूबर को कलेक्टर कांफें्रस में जिन कलेक्टरों का पारफारमेंस पुअर होगा, उनके भी नम्बर लगेंगे। दरअसल, सूबे में प्रमोटी कलेक्टरों की संख्या बेहद कम है। यूपी, पंजाब जैसे राज्यों में आधे से अधिक प्रमोटी आईएएस कलेक्टर एवं एसपी होते हैं। सियासी गणित में प्रमोटी ज्यादा मुफीद बैठते हैं। 2013 के विधानसभा चुनाव के समय भी 11 जिलों में प्रमोटी आईएएस कलेक्टर थे। नीलकंठ टेकाम को मिलाकर अभी सात पहुंचे हैं। हालांकि, राज्य में आरआर आईएएस की संख्या बढ़ गई है, फिर भी चार-से-पांच और प्रमोटी को जिले में भेजा जाएगा। कांडागांव के बाद दंतेवाड़ा और बीजापुर में भी प्रमोटी पोस्ट किए जाएंगे। दंतेवाड़ा कलेक्टर सौरभ कुमार को जांजगीर का कलेक्टर बनाए जाने की चर्चा है।

वक्त-वक्त की बात!

एक वो भी वक्त रहा, जब 2011 में 87 बैच के आईएएस सीके खेतान और आरपी मंडल टाईम से पांच महीने पहिले प्रमोशन पाकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बन गए थे। उनके साथ बीबीआर सुब्रमण्यिम को दिल्ली में ही प्रोफार्मा प्रमोशन मिल गया था। और आज वक्त ऐसा है कि जनवरी से तीनों का प्रमोशन ड्यू है…..एडिशनल चीफ सिकरेट्री बनने के लिए वे टकटकी लगाए बैठे हैं। जबकि, दो पोस्ट भी खाली हैं। एक एनके असवाल के रिटायर होने से और दूसरा बैजेंद्र कुमार के एनएमडीसी जाने के बाद। तीसरा पोस्ट भी नवंबर में एमके राउत के सेवानिवृत होने के बाद खाली हो जाएगा। जीएडी चाहे तो हफ्ते भर का काम है। सीएम के बोलने के बाद आखिर सुनील कुजूर का डीपीसी करके पांचवें दिन एसीएस का आर्डर निकल गया था। 87 बैच में कहीं गेहूं के साथ घुन पिसने का मामला तो आड़े नहीं आ रहा है। क्योंकि, केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह इसी बैच के एक अफसर पर बेहद उखड़े थे, जब विभागीय मंत्री होने के बाद भी वे उन्हें रिसीव करने एयरपोर्ट नहीं पहुंचे। लेकिन, बाकी दो का क्या कुसूर। दोनों जब एक-दूसरे से मिलते हैं, तो पूछते हैं…मेरा क्या होगा कालिया।

जीएस की पारी अब करीब

सिंचाई विभाग के सचिव गणेश शंकर मिश्रा की पारी इस महीने 31 तारीख को समाप्त हो जाएगी। राज्य प्रशासनिक सेवा से आईएएस में आने वाले मिश्रा पोस्टिंग के मामले में इतने किस्मती रहे हैं कि उनके मित्र भी उनसे ईर्ष्या रखते हैं। वे लंबे समय तक एक्साइज में रहे। जनसंपर्क के डायरेक्टर के साथ उसके सचिव भी रहे। वीआईपी डिस्ट्रिक्ट राजनांदगांव का कलेक्टर रहने का भी उन्हें मौका मिला। मिश्रा को पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग के लिए रेरा का मेम्बर बनाए जाने की अटकलें लगाई जा रही है।

भूपेश का फेवीकोल

भूपेश बघेल को दूसरी बार पीसीसी चीफ बनने से रोकने के लिए पार्टी के उनके मित्रों ने क्या नहीं किया। आलाकमान तक तगड़ा मैसेज पहुंचाने के लिए पीएल पुनिया के पहिले दौरे में त्रिफला के नए एडिशन को लांच किया गया….रामदयाल उईके को बगावती सूर के साथ बैटिंग करने भेजा गया। मगर इनमें से कोई भी नुख्सा काम नहीं आया। अलबत्ता, पुनिया को भी छत्तीसगढ़ कांग्रेस में नेताओं के शह-मात के खेल को समझने में देर नहीं लगा। तभी तो लफड़ा खतम करने के लिए पुनिया ने आलाकमान से पहले ही भूपेश को अध्यक्ष बनाने का स्पष्ट संकेत दे डाला। अब, कांग्रेस के लोग फेवीकोल की उस कंपनी का पता लगा रहे हैं कि आखिर राहुलजी से ये आदमी इतना बुरी तरह कैसे चिपक गया है….त्रिफला से लेकर आदिवासी विधायक के तेवर भी काम नहीं आए।

कार्यकारी अध्यक्ष नहीं

भूपेश बघेल को सेकेंड इनिंग देने के साथ ही कांग्रेस छत्तीसगढ़ में कार्यकारी अध्यक्ष भी नहीं बनाएगी। प्रभारी महासचिव पीएल पुनिया के पहले दौरे से पहिले रामदयाल उईके ने बगावती तेवर दिखाए थे, तब पुनिया ने उन्हें तलब किया था। रामदयाल ने उनसे दो टूक कहा था कि छत्तीसगढ़ में अगर कांग्रेस की सरकार बनानी है तो अनुसूचित जाति और जनजाति से एक-एक कार्यकारी अध्यक्ष बनाना चाहिए। लेकिन, कार्यकारी अध्यक्ष को लेकर पार्टी का अनुभव ठीक नहीं रहा है। छत्तीसगढ़ में भी चरणदास महंत और सत्यनारायण शर्मा को 2007 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया था। तब धनेंद्र साहू पीसीसी चीफ थे। तब कांग्रेस तीन खेमों में बंट गई थी। पार्टी अब फिर से इस तरह की स्थिति नहीं लाना चाहती। बताते हैं, राहुल गांधी ने भी कार्यकारी अध्यक्ष के कंसेप्ट को खारिज कर दिया है।

गुड न्यूज

बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का रायगढ़ मॉडल अब प्रदेश के सभी जिलों में लागू किए जाएंगे। रायगढ़ पहिला जिला है, जहां बिटिया के जन्म लेने पर माता-पिता को तोहफा दिया जाता है….बुके भेंट कर अभिनंदन भी। इस जिले में न केवल बालिकाओं का अनुपात बढ़ा है बल्कि डिस्ट्रिक्ट एडमिनिस्ट्रेशन के प्रयासों से स्कूलों में बालिकाओं की उपस्थिति भी बढ़ी है। 12 अक्टूबर को चीफ सिकरेट्री ने वीडियोकांफ्रेंसिंग में रायगढ़ कलेक्टर शम्मी आबिदी को बेटी बचाओं में आउटस्टैंडिंग काम के लिए एप्रीसियेट किया….ग्रेट शम्मी!

अंत में दो सवाल आपसे

1. चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड ने रेरा चेयरमैन के लिए अप्लाई कर दिया है या करने वाले हैं?
2. जीएस मिश्रा के बाद ईरीगेशन सिकरेट्री किसी यूथ आईएएस को बनाया जाएगा या किसी सीनियर अफसरों को टिकाया जाएगा?