मंगलवार, 16 जनवरी 2018

रमन मिलाई जोड़ी

13 जनवरी
अजय सिंह के सूबे के चीफ सिकरेट्री बनने के बाद छत्तीसगढ़ के 80 हजार स्केल वाले तीनों शीर्ष पोस्ट पर अब एक राशि के अफसर हो गए हैं। तीनों का स्वभाव लगभग एक समान है। बेहद कूल। सौम्य और शालीन। डीजीपी एएन उपध्याय का चेहरा ऐसा है कि कोई कितने भी गुस्से में जाए, निकलने पर बोलेगा….काम नहीं हुआ मगर आदमी शरीफ हैं। उनके डीजी बनने के बाद गुटबाजी से लेकर पीएचक्यू की दुकानें बंद हो गई है….सरकार को आखिर क्या चाहिए। पीसीसीएफ आरके सिंह लंबे समय तक विदेशों में रहे हैं। इसलिए, रहते हैं हमेशा सूटेड-बूटेड। लेकिन, सज्जनता और ईमानदारी तो पूछिए मत! रिजल्ट देने वाले अफसर में उनकी गिनती होती है। रही-सही कसर अजय सिंह को चीफ सिकरेट्री बनाकर मुख्यमंत्री ने पूरी कर दी है। चलिये, ऑस्ट्रेलिया में डाक्टर साब चैन से रहेंगे, काम भले ही फास्ट नहीं हो लेकिन, उंच-नीच नहीं होगी, इसकी पूरी गारंटी रहेगी।

रेरा का पेड़ा

चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड आखिरकार रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी के चेयरमैन बनने में कामयाब हो गए। इसके लिए उन्होंने चीफ सिकरेट्री की कुसी ढाई महीने पहिले ही छोड़ दी। रेरा का चेयरमैन बनने वाले वे देश के दूसरे चीफ सिकरेट्री होंगे। उनसे पहिले मध्यप्रदेश के रिटायर चीफ सिकरेट्री डिसूजा को शिवराज सरकार ने इस मलाईदार कुर्सी पर बिठाया था। जबकि, वहां भी रेरा के पेड़ा के लिए दर्जनों लोग लगे थे। डिसूजा और ढांड में फर्क यह है कि ढांड रिटायरमेंट से पहिले वीआरएस लेकर रेरा की चेयरमैनी संभाली है। बिल्डरों पर अंकुश लगाने के कारण रेरा चेयरमैन की कुर्सी को जलवादार के साथ ही मलाईदार मानी जा रही है।

कांग्रेस को बेचैनी

चुनावी साल में सरकार का लोक सुराज कांग्रेस के लिए चिंता का सबब बन सकता है। क्योंकि, क्योंकि सरकार इसे कैश करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी। अब, बलौदा बाजार के खैरा गांव को ही लें। सीएम का हेलिकाप्टर वहां लैंड किया। डाक्टर साब ने भाषण के अंत में कहा कि आपलोगों की सेवा करता रहूं, इसके लिए आप लोग दोनां हाथ उठाकर मुझे आर्शीवाद दीजिए। इस पर सैकड़ों हाथ उठ गए। अब, किसे पता वे सेवा करने का आर्शीवाद मांगे या चौथी पारी के लिए। मंत्रियों के जनसमस्या शिविरों पर सवाल उठाने वाली कांग्रेस के जाहिर है, इससे बेचैनी बढ़ेगी।

कोई इधर गिरा, कोई….

डीआईजी की पोस्टिंग देखकर आपको लगा होगा कि क्यों सूबे के कुछ आईपीएस डेपुटेशन के लिए खूंटा तूड़ा रहे थे। इस बार 11 आईपीएस डीआईजी प्रमोट हुए हैं। इनमें से सिर्फ नेहा चंपावत लकी रहीं। उन्हें पति मिला….पति मिलने का आशय आप गलत मत निकालियेगा….वो कोई खोए नहीं थे। किसी बात पर सरकार ने अविनाश चंपावत को रायपुर से सरगुजा भेज दिया था। कमिश्नर बनाकर। नेहा को डीआईजी प्रमोट करने के बाद सरकार ने रहम दिखाई। सरगुजा में छत्तीसगढ आर्म्स फोर्स में डीआईजी का एक नया पोस्ट क्रियेट कर अब उन्हें भी वहां भेज दिया है। बचे दस। उन बेचारों को तो पूछिए मत…कोई इधर गिरा, तो कोई उधर। पत्नी, बच्चे, डॉगी तक दुखी हैं। डीआईजी बनने वालों में पांच तो बड़े-बड़े जिलों के कप्तान थे। कप्तानी के बाद उन्हें पेवेलियन में दर्शक बनाकर बिठा दिया गया है। अब एक गाड़ी, एक घर में काम चलाना पड़ेगा। जिले का आरआई तो घर से लेकर बाहर तक का इंतजाम देख लेता था। रायपुर में दर्जनों आईपीएस हैं, यहां का आरआई किसको-किसको देखेगा। यही तो अंतर है, आईएएस और आईपीएस में। आईएएस में पावर बढ़ता जाता है। आईपीएस में एसपी के बाद सब खतम। इसमें तीन ही महत्वपूर्ण होते हैं, थानेदार, एसपी और डीजीपी। जीपी सिंह और दीपांशु काबरा जैसे आईजी हों तो बात अलग है। वरना, आईजी में 25 फीसदी ही रुतबा रह जाता है। बहरहाल, डीआईजी लोगों को सहानुभूति की जरूरत है। अब अगले पांच साल उन्हें जमापूंजी में से काम चलाना होगा।

कलेक्टरों की लिस्ट

एसपी, डीआईजी लेवल पर बड़ी सर्जरी के बाद ब्यूरोक्रेसी में कलेक्टरों के ट्रांसफर की अटकलें चल रही थी। लेकिन, पता चला है कलेक्टरों के ट्रांसफर अब टीम रमन के ऑस्ट्रेलिया से लौटने के बाद ही हो पाएगा। वैसे, नाम कम हैं, इसलिए सरकार भी बहुत जल्दी में नहीं है। बावजूद इसके, कलेक्टरों की रात की नींद उड़ी हुई है….जबकि, सीएम ऑस्ट्रेलिया जाने के लिए दिल्ली पहुंच गए हैं। आखिर, वे सीएम के चीन प्रवास को भूले नहीं हैं। दो साल पहिले रायपुर से टेकऑफ करने के 15 मिनट बाद इंडिगो का प्लेन जब 20 हजार फुट की उंचाई पर पहुंचा तो सीएम ने अफसरों से बात करके लिस्ट को ओके कर दिया था। और, दिल्ली एयरपोर्ट से ही मीडिया को सूची जारी हो गई थी। कलेक्टरों को लग रहा, क्या पता 14 जनवरी को दोपहर ऑस्ट्रेलिया के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट में बैठने से पहिले कुछ अनहोनी हो जाए। ऐसे में, उनकी बेचैनी समझी जा सकती है।

हमारी उमर लग जाए….

सरकार ने एक झटके में 15 जिलों के एसपी बदल दिए। पहली बार लिस्ट ऐसी निकली कि दो-एक को छोड़कर सभी सरकार को दुआएं दे रहे हैं….तुमको हमारी उमर लग जाए। जो दुखी हैं, वो भी हंड्रेड परसेंट नहीं, फिफ्टी परसेंट। पारुल माथुर बेमेतरा में एसपी रह चुकी हैं। तीन साल से वे रेलवे एसपी थीं। इसके बाद भी उन्हें मुंगेली एसपी बनाकर भेज दिया गया, जो किसी आईपीएस का पहला जिला होता है। नीथू कमल का पहला जिला मुंगेली ही था। लोग इस पर चुटकी ले रहे हैं, पारुल के आईपीएस पिता राजीव माथुर से जरूर पीएचक्यू के किसी अफसर से नाराजगी रही होगी, वरना….। दूसरे दुखियारे हैं, डी श्रवण। श्रवण लंबे समय बस्तर में रहकर पिछले साल ही कोरबा पहुंचे थे। इस आस में कि अब दो-चार साल सुकून के साथ मैदानी इलाके में गुजरेगा। लेकिन, उन्हें फिर बस्तर भेज दिया गया। इन दोनों के अलावे बाकी सबकी निकल पड़ी। मयंक श्रीवास्तव तक कोरबा एसपी बन गए। आरिफ शेख बस्तर से बिलासपुर, दीपक झा बालोद से रायगढ़ और मुंगेली एसपी नीथू कमल को जांजगीर जैसा जिला मिल गया, जहां 2004 बैच के अजय यादव एसपी थे। नीथू 2008 बैच की हैं। रायपुर एसपी संजीव शुक्ला को बिना मांगे मुराद मिल गई। वे चाहते थे, भले पीएचक्यू में ही पोस्ट कर दो, लेकिन यहां से शिफ्थ करो। वे दुर्ग जैसे जिले की कमान पा गए। सालों से बस्तर में पड़े नारायणपुर एसपी संतोष सिंह वहां से निकलने में सफल हो गए। उन्हें महासमुंद जिला मिल गया। एसपी को देखकर कलेक्टर भी प्रार्थना कर रहे….हमारी सूची भी ऐसी ही निकले।

बी फॉर…..

हालांकि, इसे एक संयोग कह सकते हैं, लेकिन आईपीएस आरिफ शेख के साथ लगातार चौथी बार हुआ है। बी नाम वाले जिले में वे चौथी बार एसपी बने हैं। बालोद, बलौदा बाजार, बस्तर और बिलासपुर। आरिफ के साथ एक इत्तेफाक यह भी रहा है, एक साल के भीतर उनका तीसरी बार ट्रांसफर हुआ। बालोद से बलौदाबाजार, फिर बस्तर और वहां से बिलासपुर। और, यह भी…उन्होंने बद्री मीणा के सात जिले की बराबरी भी कर ली है। गरियाबंद, धमतरी, जांजगीर, बालोद, बलौदा बाजार, बस्तर और बिलासपुर।

अंत में दो सवाल आपसे

1. शैलेष नीतिन कांग्रेस के मीडिया सेल के फिर प्रमुख बनाए गए हैं और पूर्व पत्रकार विनोद वर्मा भी अंदरखाने से मीडिया को ही टेकल करते हैं। ऐसे में, दोनों के बीच टकराव तो नहीं होगा?
2. बालोद जैसे छोटे जिले से जम्प लगा दीपक झा सीधे रायगढ़ के एसपी बन गए। ये कैसे हुआ?

ऐ दिल है मुश्किल…!

7 दिसंबर
वेटिंग सीएस अजय सिंह का प्रोबेशन इतना लंबा खींचता जा रहा है कि अब लोग भी कहने लगे हैं सरकार माटी पुत्र के धैर्य की परीक्षा ले रही है। कहां, दिसंबर को लेकर उम्मीदें थी। अब जनवरी आया तो टीम रमन का ऑस्ट्रेलिया ट्रिप। वहां से लौटते ही 5 फरवरी से विधानसभा। फिर, उसके बाद मार्च में लोक सुराज। जरा सोचिए! इन कड़ियों को जोड़कर अजय सिंह का दिल बैठने नहीं लगता होगा। पंडरिया के इस ठाकुर अफसर की पीड़ा उनके मोबाइल के रिंग टोन से समझी जा सकती है…..तू ही सफर मेरा….तू ही मेरी मंजिल….तेरे बिना गुजारा…..ऐ दिल है मुश्किल। कम-से-कम ठाकुरों को ठाकुर की पीड़ा को समझना चाहिए।

बड़ी देर कर दी….

आईएएस अजय सिंह ही नहीं, छत्तीसगढ़ के 11 आईपीएस प्रमोशन के लिए दिसंबर से टकटकी लगाए हैं। अलबत्ता, डीआईजी कहलाने का चार्म भी धीरे-धीरे खतम होते जा रहा है। आखिर, कोई भी चीज समय पर होता है तो उसका एनजायमेंट है। लेकिन, गृह विभाग का क्या किया जा सकता है। अगर प्रमोशन के लिए भारत सरकार को टाईम पर लेटर चला गया होता, तो ये नौबत नहीं आती। होम ने चार दिसंबर को मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर से अनुमति मांगी। नियम यह है कि एक महीने के भीतर अगर भारत सरकार से कोई रिस्पांस नहीं आया तो राज्य सरकार प्रमोशन करने के लिए स्वतंत्र हो जाती है। गृह विभाग अगर नवंबर में पत्र भेज दिया होता तो दिसंबर में ही डीपीसी हो गई होती। बहरहाल, डीजीपी एएन उपध्याय के डीजी कांफ्रेंस के सिलसिले में छत्तीसगढ़ से बाहर होने के चलते एसपी के प्रमोशन अब आठ जनवरी के बाद ही होंगे। डीजीपी प्रमोशन कमेटी के मेम्बर होते हैं।

लिस्ट में संशोधन

दुर्ग और बिलासपुर में नए आईजी की पोस्टिंग के बाद एसपी की लिस्ट में कुछ संशोधन हो सकते हैं। मसलन, प्रखर पाण्डेय। प्रखर का नाम राजनांदगांव के लिए चल रहा था। लेकिन, हो सकता है, उन्हें सीएम सिक्यूरिटी में ही कंटीन्यू किया जाए। क्योंकि, सीएम सिक्यूरिटी के लिए सरकार को ढंग का कोई अफसर नजर आ नहीं रहा। फिर, प्रखर को सीएम हाउस से बाहर निकालने पर वहां पोस्टेड और कई डीएसपी खड़े हो जाएंगे…हमें भी फील्ड में भेजो। अगर प्रखर राजनांदगांव नहीं गए तो वहां के एसपी प्रशांत अग्रवाल भी हो सकता है, वहीं कंटीन्यू करें। प्रशांत का पहले दुर्ग के लिए नाम चल रहा था। लेकिन, जीपी अब दुर्ग के आईजी बन गए हैं। जीपी ऐसे आईजी हैं कि कमजोर एसपी हो, तब भी काम चला लेंगे। रायपुर में उनके आईजी रहने के दौरान ओपी पाल लंबे समय तक एसपी रहें…इसके आप समझ सकते हैं। सरकार में उच्च स्तर पर बैठे लोग जीपी की इस प्रतिभा से वाकिफ हैं। सो, दुर्ग में कोई लो प्रोफाइल का या फिर जूनियर एसपी पोस्ट हो जाए, तो अचरज नहीं। ऐसा ही कुछ बिलासपुर में भी हो सकता है।

अब हवाई जहाज

छत्तीसगढ़ में कभी उड़ीया लॉबी सरकार चलाती थी। एसके मिश्रा जोगी के बाद रमन सरकार में भी सीएस रहे। एमके राउत का भी अपना रुतबा रहा। अब आईएएस में बच गए हैं सिर्फ सुब्रत साहू। चलिये, उड़ीसा के अफसरों की सरकार चलाने में भूमिका कम हो गई तो क्या हुआ, अब उनकी कंपनी छत्तीसगढ़ में जहाज चलाएगी।

छत्तीसगढ़ के गौरव

माटी पुत्र आईएएस जगदीश सोनकर को सरकार ने धमतरी जिला पंचायत सीईओ से हटाकर दंतेवाड़ा भेज दिया। दंतेवाड़ा के सीईओ गौरव सिंह अब धमतरी के नए सीईओ होंगे। धमतरी पंचायत मंत्री का गृह जिला है, सो वहां के लिए पसंद कर लाए जाने पर गौरव के दंतेवाड़ा के चाहने वालों ने ऐसी बिदाई दे डाली कि सुनील कुमार, विवेक ढांड और एमके राउत जैसे अफसरों ने ऐसी बिदाई की कल्पना नहीं की होगी। राजनांदगांव कलेक्टर मुकेश बंसल को वहां की एक सभा में सीएम खुद बोलकर लाए कि आपके सबसे बेहतरीन अफसर को और बड़ा काम करने के लिए मैं रायपुर लेकर जा रहा हूं और वे अपने साथ उन्हें हेलिकाप्टर में रायपुर लाएं। इसके बाद भी मुकेश की बिदाई कब हो गई, किसी को पता ही नहीं चला। एजुकेशन सिटी से सुर्खियां बटारने वाले ओपी चौधरी के फेयरवेल का पता नहीं चला। लेकिन, गौरव के फेयरवेल पर दंतेवाड़ा में जो जश्न हुआ, उसमें पैसे पानी की तरह बहाए गए। आसपास के कई कलेक्टर और एसपी भी उसमें शिरकत करने पहुंचे। विधायक देवती कर्मा समेत जनप्रतिनिधि से लेकर बड़े ठेकेदार, सप्लायर भी थे। आईएएस को कंधे पर बिठाकर भांगड़ा किया गया। ठीक है, दंतेवाड़ा में पैसे बेहिसाब है। करोड़ों रुपए माईनिंग फंड में आ रहा है। लेकिन, सरकार को कुछ करना चाहिए। कम-से-कम यंग आईएएस सीमाओं का ध्यान रखें।

शैलेंद्र सिंह की याद

अंबिकापुर कलेक्टर किरण कौशल ने वहां के डिस्ट्रिक्ट हॉस्पिटल पर अपना ध्यान फोकस किया है। डाक्टरों की मौजूदगी से लेकर तमाम चीजों पर नजर रखने के लिए उन्होंने एप बनवाया है। बताते हैं, इसके आशातीत नतीजे मिल रहे हैं। डॉक्टर टाईम से अस्पताल आने लगे हैं। इस खबर को पढ़कर 87 बैच के तेज-तर्रार आईएएस शैलेष सिंह की याद ताजा हो गई। मुश्किल से डेढ़ साल बिलासपुर का कलेक्टर रहने का उन्हें मौका मिला। 99 मध्य से नवंबर 2000 तक। और, उन्होंने लोगों को बताया कि कलेक्टर अगर चाहे तो कुछ भी कर सकता है। जिला अस्पताल जो अब सिम्स बन गया है, कलेक्टर ने ऐसी व्यवस्थाएं बनाई कि लोग आज भी उन्हें याद करते हैं। अस्पताल पर नकैल कसने के लिए रोस्टर में रोज एक डिप्टी कलेक्टर की उन्होंने अस्पताल में ड्यूटी लगा दी थी। शहर में रहने पर वे खुद भी एक बार अस्पताल जाते थे। लेकिन, अब के कलेक्टरों को अस्पताल प्राथमिकता में रहा नहीं। एकाध इनोवेशन का काम पकड़कर सरकार से शाबासी ले लों। बाकी, अस्पताल में आम आदमी भेड़-बकरियों की तरह धक्के खा रहा है, तो खाने दो। भगवान ने आम आदमी इसीलिए तो बनाया है। चलिये, अच्छी बात है….एक महिला कलेक्टर ने उस संस्थान की सुध ली है, जहां 70 से 80 फीसदी दुखी-पीड़ित लोग पहुंचते हैं।

मंत्री की भड़ास

सीएम के साथ 5 दिसंबर को सरगुजा और जशपुर गए पीडब्लूडी मिनिस्टर राजेश मूणत वहां के एक आईएएस पर भड़क गए। हेलीपैड पर सीऑफ करने आए अफसर को मूणत यहां तक कह गए कि तुम्हारी शिकायत सौदान भाई साब तक पहुंच गई….देख लो, वरना तुम निबट जाओगे। अब लोग पता लगा रहे हैं कि माजरा क्या है। और, ये भी कि सरकार का इकबाल इतना कमजोर हो गया है कि मंत्री भी अफसरों को सौदान सिंह का नाम लेकर चमका रहे हैं।

ऐसे भी अफसर

भई! आईएफएस अफसरों का जवाब नहीं है। एक एडिशनल पीसीसीएफ के लेवल के अफसर मेडिसिनिल प्लांट बोर्ड में सीईओ रहे। जनाब ने वहां के संसाधनों का जमकर दुरु-उपयोग किया। और, वहां से हटे तो लेपटॉप, आईपैड, आईफोन और गाड़ी भी लेते गए। छह महीने बाद भी उन्होंने इसे लौटाया नहीं है। वर्तमान सीईओ शिरीष अग्रवाल ने अब परेशान होकर सरकार से दरख्वास्त किया है….अफसर से बोर्ड का सामान वापिस कराया जाए। इस एपीसोड से यह भी साफ हो गया है कि सरकारी धन को अफसर किस तरह अपना समझने लगते हैं। आखिर, आईफोन और आई पैड भी सरकारी खजाने से।

सीट आरक्षित

टीम रमन 13 को 12 दिन के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर रवाना हो रही है। टीम में सीएम के साथ सीएस, पीएस टू सीएम, सिकरेट्री इंडस्ट्री और एमडी सीएसआईडीसी के साथ डीपीआर राजेश टोप्पो शामिल हैं। राजेश पिछले बार भी साथ में थे। उससे पहिले सीएम के साथ कभी डीपीआर विदेश नहीं जाते थे। लेकिन, पिछले विदेश दौरे का मीडिया में जिस तरह कवरेज हुआ उसके बाद लगता है, सरकार ने डीपीआर के लिए एक सीट आरक्षित कर दी है।

अंत में दो सवाल आपसे

1. एक आईएफएस अफसर का नाम बताएं, जो संपत्ति के ब्यौरा में राजधानी के मौलश्री विहार के मकान की कीमत में 20 लाख रुपए का अंतर बता दिया है?
2. छत्तीसगढ़ में हवाई सेवा शुरू करने वाली कंपनी में क्या प्रदेश के किसी कांग्रेस नेता की भी हिस्सेदारी है?

मंगलवार, 2 जनवरी 2018

डीआईजी का गिफ्ट

31 दिसंबर
भारत सरकार से प्रमोशन के लिए सहमति नहीं आने की वजह से डीआईजी का प्रमोशन अब नए साल में ही हो पाएगा। हालांकि, डीआईजी में ज्यादा दिक्कत नहीं है। मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर से एक लाईन का आर्डर भर मंगाना है। चूकि, शनिवार, रविवार छुट््टी है। सो, संकेत हैं फर्स्ट वीक ऑफ जनवरी में किसी भी दिन डीआईजी की डीपीसी हो जाएगी। डीआईजी की डीपीसी में भारत सरकार के प्रतिनिधि की जरूरत भी नहीं होती। सीएस, पीएस होम और डीजीपी बैठकर कभी भी इस पर मुहर लगा सकते हैं। वैसे, आमतौर पर ईयर एंड तक एमएचए से रुटीन प्रमोशन के लिए अनुमति मिल जाती थी। लेकिन, डीजी के दो नए पदों के चक्कर में अबकी डीआईजी का मामला गड़बडड़ा गया। चलिये, ज्यादा लेट नहीं होगा। नए साल में सरकार प्रमोशन का गिफ्ट देगी। जाहिर है, पांच जिलों के एसपी समेत 11 आईपीएस डीआईजी बनने की बाट जोह रहे हैं।

एसपी की लिस्ट

एसपी की लिस्ट साल के आखिरी दिन या फिर उसके दो-तीन दिन के भीतर  निकलने की चर्चा है। बताते हैं, उच्च स्तर पर मंथन के बाद सरकार ने सूची तैयार कर ली है। लिस्ट को लेकर सरकार में असमंजस इसलिए थी कि भारत सरकार से डीआईजी के प्रमोशन के लिए हरी झंडी नहीं आई है। लेकिन, सरकार में बैठे लोग अब मान रहे हैं कि बाध्यता नहीं है कि डीआईजी बनने जा रहे एसपी को प्रमोशन के बाद ही वहां से हटाया जाए। ट्रांसफर के बाद भी उनका प्रमोशन किया जा सकता है। ऐसे में, अत्यधिक संभावना है कि 3 january से पहिले सरकार एसपी की लिस्ट जारी कर दे। हालांकि, 2008 में 31 दिसंबर को ऐसा ही हुआ था, जब लेट नाईट सरकार ने आईपीएस की लिस्ट जारी कर चौंका दिया था। वैसे, लिस्ट बड़ी होगी। 13 से 14 जिले इससे प्रभावित होंगे।

पारुल की याद

2008 बैच की आईपीएस पारुल माथुर को रेलवे एसपी बनाकर लगता है, सरकार भूल गई है। पारुल को रेलवे में गए तीन बरस से ज्यादा हो गए हैं। पारुल रिटायर आईपीएस राजीव माथुर की बेटी हैं। उनके पिता को भी जब वो अहमियत नहीं मिली, जिसके वे हकदार थे, तो उन्होंने 2007 में भारत सरकार का रुख कर लिया था। बहरहाल, पारुल बेमेतरा की एसपी रह चुकी हैं। फेमिली कारणों के चलते वे बेमेतरा से ही छुट्टी पर गईं थीं। इसके बाद उन्हें जिला नहीं मिला। राज्य में अभी दो महिला एसपी हैं। नेहा चंपावत महासमुंद और नीथू कमल मुंगेली। नेहा डीआईजी बनने वाली हैं और नीथू जा रही हैं सीबीआई डेपुटेशन पर। ऐसे में, सरकार को कहीं पारुल की याद आ गई तो उन्हें जिला मिल सकता है। वरना….।

प्रशासन अकादमी की रेटिंग?

छत्तीसगढ़ में जिन संस्थाओं को पोस्टिंग के हिसाब से लूप लाईन माना जाता था, सरकार ने लगता है उसकी रेटिंग बढ़ाने की कवायद शुरू कर दी है। मसलन, प्रशासन अकादमी। अकादमी एक्चुअल में डंप करने वाली पोस्टिंग मानी जाती थी। किसी से सरकार नाराज है तो उसे प्रशासन अकादमी भेज दिया जाता था। मगर इन दिनों दिल्ली डेपुटेशन से जो सीनियर आईएएस छत्तीसगढ़ आ रहे हैं, उन्हें सबसे पहिले प्रशासन अकादमी का डायरेक्टर जनरल बनाया जा रहा है। सीके खेतान को तो दिल्ली से लौटते ही इसका जिम्मा मिल गया था। गौरव द्विवेदी के टाईम तो प्रशासन अकादमी का क्रेज कुछ ज्यादा ही बढ़ा दिया गया। गौरव 25 नवंबर को सरकार में ज्वाईनिंग दिए थे। ठीक एक महीना बाद उन्हें 24 दिसंबर को प्रशासन अकादमी का डीजी अपाइंट किया गया। लोग अब चुटकी ले रहे हैं….प्रशासन अकादमी के लिए महीने भर का वेट….सरकार का ये कैसा हिसाब? अब कोई कुछ भी कहें, जाहिर है अकादमी की रेटिंग बढ़ रही है।

ग्रह-नक्षत्र

प्रशासन अकादमी की पोस्टिंग से आईएएस गौरव द्विवेदी को झटका लगा होगा। मगर ऐसा देखा जा रहा है, डेपुटेशन से लौटने के बाद सरकार जिन अफसरों को झूला कर पोस्टिंग देती है, उनके कई ग्रह-नक्षत्र शांत हो जाते हैं….भारत सरकार की खुमारी भी उतर जाती है। सीके खेतान को प्रशासन अकादमी में पोस्टिंग के 15 दिनों के भीतर ही सरकार ने उन्हें एसीएस फॉरेस्ट का आर्डर निकाल दिया था। यहीं नहीं, पीएस होम सुब्रमण्यिम को पटखनी देकर खेतान अपने बैच में सीनियरिटी की लड़ाई जीत गए हैं। वे अब आगे चलकर चीफ सिकरेट्री के तगड़े दावेदार हो जाएंगे। इसी तरह अमिताभ जैन को भी सरकार ने महीने भर तक बिना विभाग का रखा। उसके बाद उन्होंने धमाकेदार पारी शुरू की। पीडब्लूडी के बाद अब वे सबसे अहम विभाग फायनेंस और टैक्सेशन विभाग संभाल रहे हैं। अमित अग्रवाल को भी झुलाया गया था। लेकिन, विभाग उन्हें भी बाद में बढ़ियां मिला। फायनेंस। ये अलग बात है कि उन्होंने खुद ही मैदान छोड़ दिया। और, डा0 आलोक शुक्ला? बेहद काबिल इस आईएएस अफसर को याद होगा, सरकार ने लाल जाजम बिछा कर स्वागत किया था। आलम यह था कि चुनाव आयोग से छत्तीसगढ़ के लिए रिलीव होने के पहिले ही फूड और हेल्थ विभाग का आर्डर निकल गया था। लेकिन, आलोक राहू के ऐसे शिकार हुए कि उनका सब कुछ खतम हो गया। अब ऐसा है तो….ठीक है।

अंसारी का जाना

छत्तीसगढ़ में सीनियरिटी में दूसरे नम्बर के आईपीएस डब्लूएम अंसारी 31 जनवरी को रविवार होने के चलते एक दिन पहिले 30 दिसंबर को रिटायर हो गए। अंसारी एएन उपध्याय से वरिष्ठ होने के बाद भी डीजीपी नहीं बन पाए और ना ही छत्तीसगढ़ में उन्हें ढंग की पोस्टिंग मिली। इससे उन्हें शायद कोई रंज नहीं होगा। जितना दुख रिटायरमेंट के 15 दिन पहिले उनसे विभाग छीनने से हुआ होगा। भारत सरकार ने एक अत्यंत छोटे मामले में डीई का आदेश दिया है। भारत सरकार का लेटर आते ही गृह विभाग इतना हरकत में आया कि अंसारी के रायपुर से बाहर होने के बाद भी पवनदेव को एकतरफा चार्ज दिलवा दिया। अंसारी की इस कदर बिदाई से आईपीएस अफसर ही नहीं बल्कि लोग भी सकते में हैं। दरअसल, सरकार का ऐसा चरित्र रहा नहीं है कि किसी अफसर को जाते-जाते ऐसा सलूक किया जाए। दो डीई के बाद भी राधाकृष्ण को सम्मानपूर्वक चेन्नई जाने दिया गया। फिर, छत्तीसगढ़ में तो विभागीय जांच वाले आईएएस ठसके से कलेक्टरी कर रहे हैं। कांकेर कलेक्टर टामन सिंह सोनवाने को भ्रष्टाचार के मामले में जब नारायणपुर कलेक्टर थे, डीई शुरू हुई थी। इसके बाद उन्हें हटाने की बजाए कांकेर जैसे जिले का कलेक्टर बनाकर उनका वजन बढ़ा दिया गया। और, राज्य सरकार अगर केंद्र का पैटर्न अपना लें तो छत्तीसगढ़ के सारे आईएएस, आईपीएस के खिलाफ उसे विभागीय जांच शुरू करनी पड़ जाएगी।

सौदान का कैंप

चुनाव के एक साल पहिले सौदान सिंह जैसे नेता का बस्तर में कैंप करने का मतलब आप समझ सकते हैं। दरअसल, सरकार के तमाम बोनस और सौगातों के बाद भी बीजेपी की बस्तर में स्थिति सुधर नहीं रही है। सरकार तो वहां अपना काम कर आती है, वहां के लोकल लीडर घर से निकल नहीं रहे हैं। बस्तर से दो मंत्री हैं, दोनों सुरक्ष़्ा कारणों से हवा-हवाई हो चुके हैं। पुलिस के हेलिकाप्टर से अपने गांव-घर जाते हैं, और उसी में शाम ढलते ही लौट आते हैं। कोंडगांव से पराजित विधायक लता उसेंडी रायपुर में ही रहती हैं। कोंटा में बीजेपी के संभावित प्रत्याशी के कांग्रेस से सेटिंग की खबर आ रही है। जबकि, कांग्रेसी विधायक दीपक बैज, लखेश्वर बघेल, मोहन मरकाम, कवासी लखमा बेहद सक्रिय हैं। यहां तक कि देवती कर्मा भी गांव-गांव घूम रही हैं। ऐसे में, संगठन ने अगर कुछ नहीं किया तो पिछले बार चार सीट आ गई थी, इस बार और दिक्कत हो सकती है। सौदान इस चीज को समझकर ही बस्तर का रुख किए हैं।

अंत में दो सवाल आपसे

1. छत्तीसगढ़ के कांग्रेस नेताओं ने आजकल ताम्रध्वज साहू से मेल-मुलाकात क्यों बढ़ा दिए हैं?
2. डीजी के दो नए पदों की स्वीकृति रोकने के लिए कौन लोग मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर में फोन कर उसे अटकाने के लिए प्रेशर बना रहे हैं?

रविवार, 24 दिसंबर 2017

न्यू ईयर गिफ्ट-1


24 दिसंबर
आईपीएस अफसरों का दिसंबर एंड तक प्रमोशन हो जाता था। लेकिन, पिछले साल से वे पिछड़ने लगे हैं। आईजी अरुणदेव गौतम दिसंबर 2016 की बजाए दो महीने बाद एडीजी बनें थे। कुछ वैसा ही इस बार डीआईजी के साथ हो रहा है। 11 आईपीएस को डीआईजी प्रमोशन ड्यू हो गया है। बेचारे अजय यादव, बद्री नारायण मीणा, नेहा चंपावत, आरएस नायक, अभिषेक पाठक, डीएल मनहर, आरपी साय, जेएस बट्टी, जीएस दर्रा, सुशील द्विवेदी, अकबर कोर्राम टकटकी लगाए हुए हैं। लेकिन, भारत सरकार से अभी तक प्रमोशन के लिए हरी झंडी नहीं मिली है। अगले दो दिन छुट्टी है। इसके बाद दो-तीन रोज में अगर अनुमति नहीं मिली तो आईपीएस को नए साल के लिए वेट करना पड़ेगा। हालांकि, 2008 में एक बार सरकार ने 31 दिसंबर की देर रात आईपीएस की लिस्ट जारी कर दी थी। तब न न्यूज वेबसाइट थे और ना ही व्हाट्सएप। सो, एक जनवरी को सुबह अखबारों से लोगों को ट्रांसफर का पता चला था। 11 आईपीएस उसे ही याद कर अपने को तसल्ली दे रहे हैं कि शायद 2009 की तरह सरकार कहीं न्यू ईयर गिफ्ट न दे दें।

न्यू ईयर गिफ्ट-2

अब न्यू ईयर है तो सरकार आईएएस को कैसे छोड़ सकती है। जनवरी में कलेक्टरों की पोस्टिंग होगी, उसमें उम्मीद की जा रही है कि 2010 बैच तो कंप्लीट होगा ही 2011 बैच के भी दो-एक आईएएस के नम्बर लग सकते हैं। 2010 बैच के चार अफसरों में अब सिर्फ रानू साहू बच गई हैं। रानू फिलहाल डायरेक्टर हेल्थ हैं। हालांकि, उनके हसबैंक जयप्रकाश मौर्य सुकमा कलेक्टर हैं, ऐसा कहकर रानू को कलेक्टर बनने की राह में रोड़े अटकाएं जाते रहे हैं। लेकिन, अब स्थितियां बदलने जा रही है। तो लगता है, उन्हें जिला मिल जाएगा। फिर, बिना 2010 बैच के कंप्लीट किए, 2011 बैच का नम्बर लगेगा नहीं। सो, न्यू ईयर गिफ्ट की प्रतीक्षा में 2011 बैच भी बेकरार है।

बैड ईयर?

आईएएस, आईपीएस के लिए 2017 बेहद खराब रहा। सीबीआई को रिश्वत देने के मामले में प्रिंसिपल सिकरेट्री बीएल अग्रवाल को जेल जाना पड़़ा। इसके बाद अग्रवाल और अजयपाल सिंह को राज्य सरकार की अनुशंसा पर भारत सरकार ने नौकरी से बर्खास्त कर दिया। यह साल आईपीएस के लिए भी बढ़ियां नहीं रहा। आईजी, डीआईजी लेवल के उसके तीन अफसर टर्मिनेट हो गए। जनवरी में आईजी राजकुमार देवांगन से शुरूआत हुई और डीआईजी एएम जुरी और केसी अग्रवाल पर जाकर एंड हुआ। आईपीएस के लिए तो साल का अंत भी अच्छा नहीं रहा। सरकार ने डीजी एमडब्लू अंसारी के रिटायरमेंट से 15 दिन पहिले ही उन्हें बिना विभाग का कर दिया। आईएफएस में किसी अफसर पर कार्रवाई तो नहीं हुई लेकिन, डायरेक्टर कल्चर आशुतोष मिश्रा का स्वाईन फ्लू से निधन लोगों को जरूर दुखी किया।

सौदान का डंडा

बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन मंत्री सौदान सिंह का सत्ताधार पार्टी में क्या रुतबा है, 22 दिसंबर को विधानसभा में साफ दिखा। सौदान अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान सदन में पहुंचे थे। स्पीकर कक्ष में सबसे पहिले उन्होंने वोटिंग से गायब छह में से एक बाहुबलि विधायक की क्लास ली। विधायकजी हाथ जोड़े खड़े रहे और सौदान सिंह उन्हें सुनाते रहे। सौदान के निर्देश पर मंत्री महेश गागड़ा समेत सभी छह विधायकों को संसदीय कार्य मंत्री अजय चंद्राकर ने फौरन नोटिस जारी कर दी। यही नहीं, सीट छोड़कर इधर-उधर घूम रहे मंत्री, विधायकों को जब पता चला कि सौदान भाई साब सदन की कार्रवाई देखने दर्शक दीर्घा में आने वाले हैं, स्कूल के अच्छे विद्यार्थी की तरह सभी अपनी सीटों पर जा बैठे। सौदान के सदन पहुंचने से आधा घंटे पहिले रायपुर के एक मंत्री इतने बेचैन थे कि चार बार स्पीकर कक्ष में आकर पूछे, भाई साब आए क्या…? आखिरी में उकता कर स्पीकर के पीए ने कहा, सर, आप अंदर बैठिए, वे आएंगे तो मैं आकर आपको बता दूंगा।

रेरा का पेड़ा

सूबे के सबसे मलाईदार पोस्ट रियल इस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी याने रेरा। रेरा में जो भी बैठेगा जाहिर है, पेड़ा खाएगा। पता चला है, सरकार ने पेड़ा खाने वाले का नाम तय कर दिया है। लिफाफा भी तैयार कर अलमारी में रखा गया है। बस, ऐलान होने का इंतजार किया जा रहा है। रेरा के पेड़ा के लिए एक दर्जन लोगों ने अप्लाई किया है।

आईजी की लिस्ट

बिलासपुर रेंज के आईजी पुरुषोतम गौतम 31 दिसंबर को रिटायर हो जाएंगे। हालांकि, सरकार ने उन्हें नाइट वाचमैन बनाकर बिलासपुर भेजा था कि अमित कुमार के सीबीआई डेपुटेशन से लौटने के बाद सब ठीक कर लिया जाएगा। लेकिन, अमित कुमार सीबीआई से रिलीव नहीं हो पाए। और, गौतम सात महीने पूरे कर लिए। हालांकि, सरकार के पास अभी भी यक्ष प्रश्न बना हुआ है, आईजी किसे बनाएं। क्योंकि, अमित कुमार अभी तक लौटे नहीं। और, आईजी लेवल पर अफसर हैं नहीं। आईजी में दो ही अफसर बचे हैं। जीपी सिंह और एसआरपी कल्लूरी। जीपी बिलासपुर और रायपुर में आईजी रह चुके हैं। पिछले फेरबदल में उन्होनें दुर्ग के लिए मना कर दिया था। और, कल्लूरी को सरकार फिलहाल रेंज देने के लिए तैयार नहीं है। ऐसे में, सरकार फिलहाल किसी को बिलासपुर रेंज का एडिशनल चार्ज देकर अमित कुमार के आने तक याने 15 जनवरी तक वेट कर सकती है। या फिर अमित के आने की प्रत्याशा में आईजी की लिस्ट निकाल सकती है। ताकि, अमित लौटकर ज्वाईन कर लेंगे। विधानसभा खतम हो जाने के बाद सरकार अब इसे मूर्त रुप देगी।

मजा किरकिरा

विधानसभा का सत्र और ट्रांसफर लिस्ट ने अबकी अफसरों को विंटर वैकेशन का मजा किरकिरा कर दिया। वरना, 15 दिसंबर के बाद अधिकांश अफसर सैर-सपाटे पर चले जाते थे। क्योंकि, 25 के बाद भीड़ बढ़ जाती है। लेकिन, इस बार सरकार ने साफ कर दिया था, सत्र के चलते किसी को छुट्टी नहीं मिलेगी। फिर, आईएएस, आईपीएस में बड़ी लिस्ट निकलने वाली है। उन्हें खतरा था….कहीं छुट्टी पर गए तो इधर गिल्ली न उखड़ जाए। दरअसल, आने वाले एक महीने में आईपीएस के साथ ही कलेक्टरों के ट्रांसफर होंगे। जाहिर है, जो क्रीज पर जमे हैं, उन्हें जमे रहने या और बढ़ियां विकेट पर खेलने की लालसा होगी। और, जो मैदान से बाहर हैं, वे इस जुगत में हैं कि उन्हें अबकी मौका मिल जाए। ऐसे में, छुट्टी…ना बाबा। घूमना-फिरना बाद में होता रहेगा।

पत्नियां पर पाबंदी?

विधानसभा में अक्सर ऐसा हो रहा है….कार्रवाई के दौरान दर्शक दीर्घा मेंं जब पत्नी आकर बैठ जाती है, तो नेताओं के बोलने का संतुलन गड़बड़ा जाता है। कई बार पत्नियों पर रौब झाड़ने के लिए विधायक कुछ ज्यादा ही बोल जाते हैं। शीत सत्र में सत्ता पक्ष के
एक विधायक की पत्नी जैसे ही सदन में पहुंची, विधायकजी कांग्रेस पर चढ़ बैठे। कांग्रेस नेताओं की रेस्ट हाउस में कारगुजारियां से लेकर और भी बहुत कुछ कह गए, जिसे स्पीकर को कार्रवाई से निकलवाना पड़ा। ऐसे में, विधानसभा में लोगों ने खूब चुटकी ली….अध्यक्षजी को भाषण के दौरान पत्नियों के दर्शक दीर्घा में आने पर पाबंदी लगा देनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे

1. डिप्टी सिकरेट्री तारण सिनहा को चीफ सिकरेट्री सचिवालय से पंचायत विभाग में ट्रांसफर क्यों किया गया?
2. रायपुर एसपी संजीव शुक्ला का रायपुर से मन उचट क्यों गया है?

रेरा इज द बेस्ट?

17 दिसंबर

रेरा चेयरमैन का पद भले ही रसूख और मलाई वाला होगा, मगर मुख्य सूचना आयुक्त का ओहदा और वेतन देखकर उसके दिल में हमेशा दर्द उठता रहेगा। रेरा चेयरमैन की सेलरी चीफ सिकरेट्री याने 80 हजार का स्केल है। सब मिलाकर वेतन के रूप में रेरा चेयरमैन को सवा दो लाख रुपए मिलेंगे। वहीं, मुख्य सूचना आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस की हैसियत होने के चलते ढाई लाख रुपए सेलरी….साल में दो बार एलटीसी की पात्रता हासिल है। जबकि, रेरा चेयरमैन के ग्रेड के अफसरों को दो साल में एक बार एलटीसी की सुविधा मिलती है। बता दें, प्रदेश में ढाई लाख वेतन वाला कोई दूसरा पोस्ट नहीं है। हालांकि, जीएडी ने रेरा चेयरमैन का वेतन बढ़ाने के लिए कम कोशिशें नहीं की। नोटशीट भी चल चुकी थी। बाद में पता चला कि रेरा के अपीलीय अधिकारी हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस या उनके समकक्ष होंगे। इनका वेतन ढाई लाख रुपए है। सो, अपीलीय अधिकारी के बराबर रेरा के चेयरमैन की सेलरी हो नहीं सकती। लिहाजा, मन मारकर उसे सवा दो लाख पर ही फायनल कर दिया गया। बावजूद इसके, रेरा का मुकाबला नहीं है।, रेरा इज द बेस्ट।

नेतागिरी में नुकसान

भानुप्रतापुर के आईएएस एसडीएम वेंकट को सरकार ने मंदिर तोड़ने की घटना में वहां से हटा दिया। लेकिन, इससे ज्यादा नुकसान उन्हें आईएएस एसोसियेशन की नेतागिरी में हो गया। वेंकट की पोस्टिंग को लिए अजय सिंह को साथ लेकर आईएएस एसोसियेशन चला गया चीफ सिकरेट्री के पास। इससे सरकार नाराज हो गई। जाहिर है, कई बार अपने लोग ही काम बिगाड़ देते हैं। भानुप्रतापपुर की घटना कैसे हुई, इसकी विस्तृत जानकारी रायपुर नहीं आई है, लेकिन वेंकट ठीक-ठाक एवं उत्साही अफसर माने जाते हैं। मगर आईएएस लॉबी के चलते वे विवादित हो गए।

जंगल और बिहार

सरकार ने जंगल विभाग को बिहार के दो अफसरों के हवाले कर दिया है। पहले सीके खेतान को एसीएस फॉरेस्ट बनाया फिर आरके सिंह को पीसीसीएफ। खेतान सासाराम से हैं तो सिंह आरा के। दोनों अपने-अपने फील्ड के मास्टर हैं। पीसीसीएफ तो वर्ल्ड बैंक से लेकर और कई बड़े प्रोजेक्टों में काम कर चुके हैं। सरकार ने उन्हें वाईल्डलाइफ का दोहरा चार्ज देकर और वजनदार बना दिया है। लेकिन, खेतान ने पहली गेंद पर चौका लगाकर पारी की शुरूआत की है, उससे वन विभाग भौंचक हैं। उन्होंने अचल संपत्ति का ब्यौरा जमा न करने वाले अफसरों की जानकारी मांग ली है। चलिये, उम्मीद कीजिए, खेतान और सिंह मिलकर वन विभाग की छबि दुरुस्त करें।

बाड़ ही खेत खा जाए तो….

बात कुछ साल पुरानी है….अमित कटारिया रायगढ़ के कलेक्टर थे। उनकी पत्नी जिंदल स्टील के प्लेन का पायलट बन गई थी। तब तत्कालीन चीफ सिकरेट्री सुनिल कुमार बेहद नाराज हुए थे। उनका कहना था कि इससे मैसेज अच्छा नहीं जाता। जाहिर है, अफसर अगर प्रायवेट लोगों से ओब्लाइज है, तो वह इसका फायदा उठाएगा या लेने की कोशिश करेगा। ताजा खबर है, एक आईएएस ने अपनी पत्नी को प्रायवेट यूनिवर्सिटी का डायरेक्टर बना दिया है। हालांकि, इस पर सरकार भी कुछ नहीं कर सकती। क्योंकि, बाड़ ही अगर खेत खाने लगे तो भी खेत की रक्षा कौन करेगा।

वक्त की बात!

आईएएस पी जॉय उम्मेन छत्तीसगढ़ में साढ़े तीन साल चीफ सिकरेट्री रहे। विवेक ढांड के बाद सर्वाधिक समय तक। नया रायपुर की बुनियाद उन्होंने ही रखी। मंत्रालय और डायरेक्ट्रेट भी उनके समय बना। लेकिन, वीआरएस लेने के बाद अब उनका वक्त कुछ ठीक नहीं चल रहा है। केरल में जिस परिवहन मंत्री थामस कूक का वे एडवाइजर बने थे, जमीन घोटाले में सीएम ने उनकी छुट्टी कर दी। उम्मेन चूकि, मंत्री के सलाहकार थे, इसलिए मंत्री के साथ उन्हें भी हटना पड़ गया।

वेटिंग सीएस और ब्लडप्रेशर

वेटिंग सीएस अजय सिंह की ताजपोशी में कोई अड़चन नहीं है। इसके बाद भी ऐसा कुछ हो रहा है या किया जा रहा है कि उनकी ब्लडप्रेशर बढ़ जा रहा होगा। असल में, बाजार में चर्चा है कि चीफ सिकरेट्री विवेक ढांड को सरकार एक्सटेंशन दे सकती है। तो उधर, सीएम ने हैदराबाद में एनएमडीसी के डायमंड जुबली प्रोग्राम में एन बैजेंद्र कुमार की इतनी जोर से पीठ थपथपा आए कि पूछिए मत! सीएम बोले, बैजेंद्र मेरे परिवार के हिस्सा थे, और इन्हें एनएमडीसी के चहुमुखी विकास के लिए मैंने आपके पास भेजा है। बैजेंद्र की अब ऐसी तारीफ होगी तो वेटिंग सीएस की स्थिति समझी जा सकती है।

डीजी की नाराजगी

कोंडागांव एसपी को डीजी नक्सल डीएम अवस्थी की नाराजगी भारी पड़ गई। सरकार ने उनकी छुट्टी कर दी। दरअसल, नक्सल मूवमेंट में कोंडागांव पुलिस की ढिलाई से डीएम नाराज थे। उपर से नक्सलियों द्वारा बुधवार को गाड़ियों को जलाने की घटना हो गई। डीएम ने यह जानकारी सरकार को दी। और, सरकार ने एसपी को हटाने में देर नहीं लगाई।

अंत में दो सवाल आपसे

1. चार में से फर्स्ट फेज में सरकार किन दो आईपीएस अफसरों को सीबीआई में जाने के लिए हरी झंडी देने जा रही है?
2. मुख्यमंत्री के तथास्तु कहने के बाद भी आरा मिल प्रकरण की फाइल क्यों लटकाई जा रही है?

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

सोच में जीएडी

रिटायर सिकरेट्री दिनेश श्रीवास्तव ने रिटायरमेंट के बाद प्रमोशन का डिमांड करके सामान्य प्रशासन विभाग को सोच में डाल दिया है। उन्होंने जीएडी को लिखा है कि जब 94 बैच के आईएएस को ड्यू डेट से 14 महीने पहिले प्रमुख सचिव बना दिया तो मेरा क्या कुसूर था। श्रीवास्तव 93 बैच के आईएएस थे। पिछले साल मार्च में वे सिकरेट्री से रिटायर हुए। श्रीवास्तव का कहना है, जीएडी चाहता तो उन्हें प्रमोशन देकर प्रिंसिपल सिकरेट्री बना सकता था। बहरहाल, जीएडी के अफसर उधेड़बुन में हैं कि श्रीवास्तव को क्या जवाब दिया जाए।

झलियामाड़ी स्टाईल

शिक्षाकर्मियों के आंदोलन को भी झलियामाड़ी कांड की तरह निबटाया गया। याद होगा, रमन सरकार की दूसरी पारी में कांकेर जिले के झलियामाड़ी ट्राईबल हॉस्टल में बच्चियों के साथ सेक्सुअल ह्रासमेंट की घटनाएं हुईं थीं। तब छत्तीसगढ़ हिल गया था। कांग्रेस ने इसे बड़ा इश्यू बनाते हुए पूरे प्रदेश में आंदोलन चलाने के साथ ही राज्य बंद का ऐलान किया था। लेकिन, सरकार के रणनीतिकारों ने ऐसा किया कि मामला ही फुस्स हो गया। आंदोलन शुरू होने की सुबह पीड़ित बच्चियों के परिजनों का लेकर बस सीधे सीएम हाउस के अंदर चली गई थी। मीडियाकर्मी जब हाउस पहुंचे, तब तक सीएम से परिजन मुलाकात कर कार्रवाइयों पर संतोष जता चुके थे। इसी तरह का कुछ ऑपरेशन शिक्षाकर्मी में हुआ। सरकार ने अपने दो प्यादों से वजीर मारने जैसा काम कर दिखाया। मंत्रियों, अफसरों के साथ ही कांग्रेस को सुबह मीडिया से पता चला कि स्ट्राईक कल रात में ही समाप्त हो गई है। वह भी बिना शर्त। कांग्रेस के पास अब कोसने के अलावा कोई चारा नहीं था।

विकास शील डेपुटेशन पर?

प्रिंसिपल सिकरेट्री विकास शील डेपुटेशन पर दिल्ली जा सकते हैं। बहुत पहिले उन्होंने सरकार से अनुमति मांगी थी। सरकार के पास उनका लेटर पेंडिंग है। विकास शील की वाइफ निधि छिब्बर इसी साल मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस में दिल्ली गई हैं। अब चूकि, गौरव द्विवेदी दंपति प्रतिनियुक्ति से लौट कर छत्तीसगढ़ आ गए हैं। गौरव की पत्नी ज्वाईन करने के बाद चाईल्ड केयर लीव पर चली गई है। जाहिर है, वे भी कुछ दिन बाद लौट आएंगी। लिहाजा, विकास शील को डेपुटेशन के लिए एनओसी देने में अब कोई दिक्कत नहीं है। समझा जाता है, इसी दृष्टि से डॉ0 रोहित यादव को सामान्य प्रशासन विभाग का एडिशनल चार्ज दिया गया है। ताकि, विकास शील के जाने के बाद रोहित जीएडी संभाल लें।

ऑल रिजनल सर्विस

आईएएस अफिसर ऑल इंडिया सर्विस के होते हैं। इसलिए नाम भी है इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस। मगर छत्तीसगढ़ में एक क्षेत्र विशेष के आईएएस जिस तरह क्षेत्रवाद चला रहे हैं, इससे लगता नहीं कि वे ऑल इंडिया सर्विस के अफसर हैं। आलम यह है कि उन अफसरों की एक्टिवीटी को देखकर अब ब्यूरोक्रेसी में लोग कहने लगे हैं, इन लोगों के लिए एक ऑल इंडिया सर्विस के भीतर एक ऑल रिजनल सर्विस बना देना चाहिए….ऑल रिजनल सर्विस का व्हाट्सएप बनाकर उसी में अपना गुटरगूं करते रहे।

विधानसभा के बाद

पुलिस महकमे की सर्जरी अब विधानसभा के बाद ही हो पाएगी। 22 दिसंबर को सत्र ओवर हो जाएगा। इसके बाद 25 को क्रिसमस है। इसी के आसपास डीपीसी होगी। आधा दर्जन आईपीएस इसमें प्रमोट होकर डीआईजी बनेंगे। तो कुछ को सलेक्शन ग्रेड मिलेगा। डीआईजी बनने वालों में चार एसपी भी हैं। जाहिर है, इनके अलावा कुछ और जिलों में चुनावी दृष्टि से सरकार एसपी बदलेगी। सब मिलारक लगभग आठ-से-नौ जिलों के कप्तान बदलने के संकेत मिल रहे हैं।

मंत्री ने यूं बचाया

मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में मौजूद न रहने के चलते रायपुर के जिस असिस्टेंट लेबर कमिश्नर शोयब काजी को सरकार ने सस्पेंड किया था, उसे आखिरकार मंत्री भैयालाल राजवाड़े ने बहादुरी से बचा लिया। राजवाड़े ने सस्पेंशन की खबर मिलने पर उल्टे तत्कालीन प्रिंसिपल सिकरेट्री लेबर आरपी मंडल को नोटिस इश्यू कर दी थी। बाद में पता चला, मुख्यमंत्री के अनुमोदन से अफसर को निलंबित किया गया है तो मंत्री ने लिख दिया उन्होंने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यक्रम में हिस्सा लेने शोयब को मंदिर हसौद भेजा था, इसलिए शोयब सीएम के कार्यक्रम में मौजूद नहीं रह पाए। मंत्री के इस नोटिंग से लेबर विभाग सन्न है। ऐसा कि कोर्ट में वह विभाग का जवाब नहीं रख पाया। जवाब दे भी क्या….विभाग इसमें फंस जाएगा। क्योंकि, मंत्री बोल रहे हैं, मैंने अफसर को कहीं और भेजा था। तो फिर, सरकारी नाफारमानी कैसे हुई। इसी आधार पर कोर्ट ने स्टे दे दिया।

नया ट्रेंड

एंटी करप्शन ब्यूरो ने पिछले महीने एक एसडीएम को रिश्वत लेते हुए पक़ड़ा तो एसडीएम के समाज के लोग अगले दिन सरकार से मिलने पहुंच गए। अब, सीडी कांड में विनोद वर्मा को निर्दोष बताते हुए उनके समाज के लोग सड़क पर उतर गए। उधर, सिकरेट्री ईरीगेशन सोनमणि बोरा ने एक सब इंजीनियर को सस्पेंड क्या किया इंजीनियर उन्हें लाल सलाम बोल ललकारने लगे हैं। ऐसे में, राज्य में अराजकता फैल जाएगी….कोई अफसर काम ही नहीं कर पाएगा। हालांकि, अफसरों को भी कार्रवाइयों में भेदभाव नहीं बरतनी चाहिए।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. मुख्यमंत्री द्वारा जोगी कांग्रेस को चुनौती के रूप में उभरना बताने के पीछे क्या राजनीतिक उद्देय हो सकते हैं?
2. देवेंद्र वर्मा ने प्रमुख सचिव संसदीय कार्य के बाद विधानसभा अध्यक्ष का सलाहकार बनने से भी क्यों इंकार कर दिया?

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

वेटिंग सीएस और प्रोबेशन पीरियड

3 दिसंबर
वेटिंग सीएस और प्रोबेशन पीरियड
राज्य सरकार ने एसीएस अजय सिंह को वेटिंग सीएस के तौर पर प्रोबेशनर के रूप में काम लेना शुरू कर दिया है। मंत्रालय की कई अहम मीटिंगों में विवेक ढांड की जगह इन दिनों अजय सिंह नए जाकिट में दिख रहे हैं। 30 नवंबर को सीएम फेलोशिप के तहत सलेक्ट यंग प्रोफेशनल के साथ फोटो सेशन में भी सीएम की दाई ओर अमन सिंह औ बाएं अजय सिंह नजर आए। लेकिन, दिक्कत यह है कि सरकार ने उनका प्रोबेशन पीरियड तय नहीं किया है। हफ्ते, महीना या जनवरी….कुछ कहा नहीं जा सकता। रेड़ा का पेड़ा बंटने के बाद भी कोई भरोसा नहीं….आजकल करते-करते…..। जाहिर है, अजय सिंह को यह ब्लाइंड प्रोबेशन पीरियड परेशान कर रहा होगा।

राजनीति में अंसारी?

84 बैच के आईपीएस डब्लूएम अंसारी के लिए दिसंबर आखिरी महीना होगा। 31 को वे रिटायर हो जाएंगे। अंसारी तेज अफसर माने जाते हैं। लेकिन, उनकी किस्मत उतनी तेज नहीं निकली। राज्य बनते ही वे जोगी सरकार के निशाने पर आ गए थे। जशपुर के लीली कुजूर दुष्कर्म कांड में उन्होंने तत्कालीन सरकार के जशपुर के प्रिय कलेक्टर एमआर सारथी के खिलाफ दबाकर जांच कर दी थी। इस पर सरकार ने उन्हें उस दंतेवाड़ा का डीआईजी बनाकर भेज दिया था, जो ठीक से जिला का शेप नहीं ले सका था। कांग्रेस के निशाने पर रहने का स्वाभाविक लाभ उन्हें बीजेपी शासन में भी नहीं मिला। उल्टे, एडीजी जेल रहने के दौरान डेपुटेशन पर दिल्ली जाकर उनसे एक बड़ी भूल हो गई। अगर वे दिल्ली नहीं गए होते तो गिरधारी नायक और अंसारी याने दो-दो सीनियर अफसरों को सुपरशीट करके एएन उपध्याय को डीजी बनाने से पहिले सरकार को सोचना पड़ता और बनाती तो भी बैलेंस करने के लिए अंसारी का ठीक-ठाक विभाग मिल गया होता। अब खबर है, अंसारी रिटायर होने के बाद राजनीति में किस्मत आजमाने की सोच रहे हैं। यूपी में उनके परिवार से जुड़े लोग राजनीति में हैं भी। दुआ करें, राजनीति में उनकी किस्मत साथ दे दें।

सिर मुड़ाते ओले….

पंचायत विभाग संभालने वाले आरपी मंडल के लिए शिक्षाकर्मियों की हड़ताल सिर मुड़ाते ओले पड़ने जैसी हो गई है। शिक्षाकर्मियों की हड़ताल उन्हें गिफ्ट में मिला ही अलबत्ता, विभाग का चार्ज लेने से एक दिन पहिले ही सरकार ने हड़ताली शिक्षकों से बात करने का शेड्यूल तय कर दिया। हालांकि, वार्त्ता विफल हो गई। मगर मंडल सिर पर हाथ फेरते हुए खुद ही चुटकी ले रहे हैं….मेरा क्या होगा…..। दरअसल, वे सचमुच सिर मुड़ाएं हुए हैं। हाल ही में उनकी मदर इन लॉ की डेथ हुई है।

दो बैचलर, एक विभाग

सरकार ने नगरीय प्रशासन सिकरेट्री रोहित यादव को जीएडी सिकरेट्री का एडिशनल चार्ज दिया है। विकास शील इस विभाग के प्रिंसिपल सिकरेट्री हैं। इसमें खबर ये नहीं है कि जीएडी में दो सिकरेट्री क्यों….पहले भी ऐसा रहा है। एक आईएएस देखता है, दूसरा राज्य प्रशासनिक सेवा। खास यह है कि दोनों बिना पत्नी वाले हैं। बिना पत्नी का आशय आप दूसरा ना निकालें। दोनों की आईएएस पत्नी डेपुटेशन पर दिल्ली चली गई हैं। पहले विकास शील की पत्नी निधि छिब्बर डिफेंस में गईं और इसी अक्टूबर में रोहित की पत्नी रितू सेन दिल्ली के छत्तीसगढ़ भवन में। लिहाजा, दोनों बैचलर हैं। ऐसे में, सरकार ने सोचा….दोनों सिंगल को एक विभाग में कर दो, पत्नियों के जाने का गम हो या खुशी, बेचारे एक-दूसरे से शेयर करते रहेंगे।

सब पर भारी

ठाकुर राम सिंह भले ही सरकार के सबसे नजदीक और पसंदीदा आईएएस रहे हों मगर ठसके के साथ पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग में अशोक अग्रवाल ने सबको पीछे छोड़ दिया। राम सिंह को रिटायर होने के बाद ढाई महीने तक पोस्टिंग के लिए इंतजार करना पड़ा था। अग्रवाल को रिटायरमेंट के चार महीने पहिले सरकार ने न केवल सूचना आयुक्त का आर्डर निकाल दिया बल्कि वीआरएस लेने का समय भी उनकी इच्छा पर छोड़ दिया। जनवरी में रिटायर होने वाले अग्रवाल ने 23 नवंबर को वीआरएस लिया है। ज्ञातव्य है, सरकार ने एक अघोषित नियम बनाया था कि रिटायरमेंट के दो महीने बाद ही पोस्ट रिटायरमेंट पोस्टिंग दी जाएगी। आरएस विश्वकर्मा से लेकर राम सिंह तक इसी के तहत पोस्टिंग हुई। लेकिन, अग्रवाल सब पर भारी पड़े।

पहली बॉल पर चौका

लगता है, खेल विभाग में खिलाड़ियों के बीच रहते-रहते आईएएस सोनमणि बोरा को यह गुर पता चल गया है कि किस बॉल को उठाकर मारना है और किसे प्लेट करना है। तभी तो ईरीगेशन संभालते ही उन्होंने पहली बॉल पर चौका जड़ दिया। उन्होंने 14 करोड़ रुपए के विवादास्पद सर्वेश्वर एनई कट के टेंडर को निरस्त करने में देर नहीं लगाई। जबकि, सर्वेश्वर एनई कट पर तत्कालीन इरीगेशन डिपार्टमेंट और ईओडब्लू के बीच तनातनी के हालात निर्मित हो गए थे। इरीगेशन के अफसरों को लेटर लिख कर बिना उनकी इजाजत के ईओडब्लू को कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया था। मुकेश गुप्ता ने इससे नाराज होकर सीएस को पत्र लिख दिया था। बहरहाल, सोनमणि बॉल को समझ गए हैं। जाहिर है, उन्हें अब बैटिंग में कोई दिक्कत नहीं आएगी।

आखिरी बात हौले से

आदमी की रीढ़ में 33 हड्डियां होती हैं….और सरकारी नौकरी में हर साल उनमें से एक हड्डी टूट जाती है। इसलिए, जो 33 साल से पहिले रिटायर हो जाते हैं, उनकी रीढ़ की कुछ हड्डियां बची होती है। लेकिन, 33 के बाद एक भी हड्डियां नहीं बचती। राजनेता ऐसे अफसरों को अत्यधिक पंसद करते हैं, जिनकी रीढ़ की समूची हड्डियां टूट चुकी हों। क्योंकि, उनसे कुछ भी करा लो…..उन्हें बिछने में दिक्कत नहीं होती।

अंत में दो सवाल आपसे?

1. ऐसा क्यों कहा जा रहा है कि आईपीएस मुकेश गुप्ता और जीपी सिंह की जोड़ी हिट होने वाली है?
2. एक सीनियर ब्यूरोक्रेट्स का नाम बताएं, जिन्हें मीटिंगों में जाने से पहिले संवरने में 10 मिनट लगता है?